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न्यूनतम वेतन अधिनियम पर राजनीतिक दलों ने

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जम्मू। आधे वेतन पर जम्मू-कश्मीर में काम कर रहे एक लाख अस्थायी कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन अधिनियम का लाभ देने की आवाज राजनीतिक दलों के अलावा सामाजिक संगठनों ने भी बुलंद करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस, पीडीपी और आम आदमी पार्टी ने केंद्र शासित प्रदेश बनने के तीन साल बाद भी जम्मू-कश्मीर में न्यूनतम वेतन अधिनियम लागू न होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए भाजपा सरकार को कर्मचारी विरोधी बताया है।
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कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रमण भल्ला का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में एक लाख से ज्यादा कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन अधिनियम का लाभ देने में विफल भाजपा जश्न मनाने में डूबी है। कर्मचारी वर्ग के लिए महंगाई के इस दौर में रोजी-रोटी का संकट बढ़ गया है। केंद्र शासित प्रदेश बनने का कोई लाभ कर्मचारियों को नहीं मिला है।
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री हर्षदेव सिंह का कहना है कि जो कानून भाजपा को पसंद होते हैं, उन्हें अमलीजामा पहनाया जा रहा है और जो कानून आम आदमी और कर्मचारी वर्ग के लिए अच्छे हैं, वह लागू नहीं हो रहे हैं। न्यूनतम वेतन अधिनियम को लागू न किया जाना भाजपा के लिए भी शर्मसार करने वाला है। कर्मचारी वर्ग को उनका हक जल्द मिलना चाहिए। आम आदमी पार्टी एक लाख कर्मचारियों के हक में अपनी आवाज पुरजोर तरीके से बुलंद करेगी और सड़क पर भी उतरेगी।
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पीडीपी के महासचिव अमरीक सिंह रीन का कहना है कि न्यूनतम वेतन अधिनियम जल्द लागू होना चाहिए। सरकार सत्ता के नशे में मस्त हैं और गरीब कर्मचारियों को उनका हक नहीं मिल रहा है। पीडीपी इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी और कर्मचारियों की मांग का पूर्ण समर्थन करती है।
मिशन स्टेटहुड के अध्यक्ष सुनील डिंपल का कहना है कि न्यूनतम वेतन अधिनियम का जम्मू-कश्मीर में अब तक लागू न होना हैरान करने वाला है। कर्मचारी वर्ग के साथ अन्याय हो रहा है। वहीं भाजपा चुपचाप तमाशा देख रही है। न्यूनतम वेतन अधिनियम कमेटी की बैठकों को भी लगातार टाला जा रहा है। सरकार की मनमानी के खिलाफ एकजुट होकर आंदोलन करने की जरूरत है।
न्यूनतम वेतन अधिनियम लागू करने के लिए सलाहकार को सौंपा ज्ञापन
जम्मू। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) के महासचिव ओम प्रकाश, जगदीश राज और अब्दुल रशीद पंडित के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को श्रीनगर में उपराज्यपाल के सलाहकार राजीव राय भटनागर को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान प्रदेश में न्यूनतम वेतन अधिनियम लागू करने की मांग की।
ज्ञापन में बढ़ती महंगाई को देखते हुए अस्थायी कर्मचारियों जिसमें सरकारी विभागों में कार्यरत डेलीवेजरों, आंगनबाड़ी वर्कर्स, आशा वर्कर, मिड डे मील वर्कर और संगठित और असंगठित क्षेत्र के निर्माण श्रमिकों के लिए न्यूनतम दिहाड़ी बढ़ाने के लिए न्यूनतम वेतन अधिनियम को जम्मू-कश्मीर में जल्द लागू करने की मांग की गई।
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