रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दो टूक कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा। पाकिस्तान को कश्मीर की रट लगाने से कोई फायदा नहीं होने वाला। उसे अपना घर संभालना चाहिए। पाकिस्तान में जैसे हालात हैं, उसमें कुछ भी हो जाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। रक्षा मंत्री ने चीन के साथ सीमा विवाद पर भी कहा, वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
जम्मू विश्वविद्यालय में आयोजित सुरक्षा कॉन्क्लेव में रक्षा मंत्री सिंह ने कहा, पीओके पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा उसे कोई अधिकार नहीं देता। पीओके के लोग देख रहे हैं कि इस तरफ लोग अमन-चैन से जिंदगी बिता रहे हैं। वहां पाकिस्तान सरकार जब उन पर जुल्म करती है, तो हमें तकलीफ होती है। उम्मीद है कि जल्द ही वहां से भारत में मिलने की आवाज उठेगी।
भारत की संसद में पीओके को लेकर प्रस्ताव पारित हो चुके हैं, जिसमें पीओके को भारत का ही हिस्सा बताया गया है। राजनाथ ने कहा, चीन से सीमा को लेकर कुछ विवाद है, इस पर सैन्य व कूटनीतिक बातचीत जारी है। हम चाहते हैं कि मामला बातचीत से हल हो। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति कायम है। सीमाओं की पवित्रता को हम किसी भी कीमत पर भंग नहीं होने देंगे।
भारत ने आतंकवाद पर अमेरिका की मानसिकता को बदला
रक्षामंत्री ने कहा कि अभी पीएम ने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ जारी संयुक्त बयान में कहा कि आज भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर कैसे अमेरिका समेत पूरे विश्व की मानसिकता को बदल दिया है। बयान में साफ कहा गया है कि यूएन सूचीबद्ध आतंकी संगठनों, जिनमें लश्कर-ए-ताइबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन शामिल हैं, के खिलाफ ठोस कार्रवाई होनी चाहिए।
पाकिस्तान हर आतंकी कार्रवाई पर लगाम लगाए। साथ ही 26/11 और पठानकोट के हमलों के दोषियों पर कार्रवाई की जाए। स्वाभाविक है पाकिस्तान के हुक्मरानों को इस संयुक्त बयान से मिर्ची लगी है। उनकी तरफ से फिर से वही रटा रटाया बयान आया है कि भारत दुनिया का कश्मीर से ध्यान हटा रहा है।
पूर्वी लद्दाख विवाद में चीन की सेनाओं ने समझौता प्रोटोकाल को नजरअंदाज किया
रक्षामंत्री ने कहा कि 2020 में चीन की सेनाओं ने समझौता प्रोटोकाल को नजरअंदाज किया जिससे पूर्वी लद्दाख में विवाद पैदा हुआ। चीनी सेना पीएलए ने एकतरफा तरीके से एलएसी पर कुछ बदलाव करने का प्रयास किया जिसे हमारे सैनिकों ने विफल कर दिया था।
गलवान की उस घटना को तीन वर्ष बीत चुके हैं, मगर जिस शौर्य, पराक्रम और संयम का परिचय भारतीय सेना ने दिया है वह देश कभी भूल नहीं सकता और आने वाली पीढि़यां भी उन जांबाज सैनिकों पर गर्व करेंगी। मुझे तकलीफ तब होती है जब सरकार को कटघरे में खडा करने के प्रयास में हमारे देश के सैनिकों के पराक्रम पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया जाता है।
भारतीय सेनाओं की प्रतिष्ठा, उनकी बहादुरी और उनकी निष्ठा पर भारतवासियों को नाज है। मैं आप सभी को आश्वस्त करता चाहता हूं कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत की सीमा, उसके सम्मान और स्वाभिमान से समझौता नहीं किया जाएगा।
ओबामा याद रखें... उन्होंने कितने मुस्लिम देशों पर हमला किया
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनको याद करना चाहिए कि अपने कार्यकाल में उन्होंने कितने मुस्लिम बहुल देशों पर हमला किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान ओबामा ने भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर विवादास्पद इंटरव्यू दिया था।
सिंह ने कहा, भारत धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां सभी धर्मों के लोग सौहार्दपूर्ण ढंग से रहते हैं। भारत में इस्लाम के सभी 72 फिरके रहते हैं। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि इतने किसी मुस्लिम देश में भी नहीं मिलेंगे।