परिवारवाद, आतंकवाद, अलगाववाद रह सकता है प्रमुख एजेंडा, कश्मीरियत, इंसानियत, जम्हूरियत की भी कर सकते हैं बात
जम्मू। अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पहली बार कश्मीर पहुंच रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कश्मीरी लोगों के सामने विकास तथा उनके जीवन में आई खुशहाली का सच दिखाने की कोशिश कर सकते हैं। परिवारवाद पर हमले कर आम जनता को यह बताने की कोशिश कर सकते हैं कि पिछली सरकारों में उनके साथ न्याय नहीं हुआ। 370 हटने के बाद अब उन्हें भी देश के अन्य राज्यों के बाशिंदों की तरह कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलने लगा है। प्रधानमंत्री कश्मीरियत, इंसानियत, जम्हूरियत की भी बात कर सकते हैं.
रैली के दौरान वह लाभार्थियों के जरिये ही कश्मीर तथा कश्मीर की अवाम को विकास की कहानियों का संदेश दे सकते हैं। केंद्र की योजनाओं का लाभ उठाते हुए कैसे किसानों, महिलाओं, युवाओं के जीवन में खुशहाली आई, इस बारे में भी अनुभव साझा कर सकते हैं। प्रधानमंत्री के संबोधन में आतंकवाद व अलगाववाद के दंश से कश्मीर को छुटकारा प्रमुख एजेंडा हो सकता है। वह यह बताने की कोशिश कर सकते हैं कि कश्मीर में अब शांति है। सभी ओर खुशहाली है। हड़ताल का कैलेंडर बंद हो गया है। अब स्कूल-कॉलेज, दुकानें नियमित रूप से खुलने लगी हैं। लोगों की जीविका पर किसी प्रकार का नकारात्मक असर नहीं पड़ रहा है। पत्थरबाजी बंद हो गई है। पुलिस से झड़पें भी बंद हो गई हैं। जो हाथ पत्थरबाजी करते थे वह अब लैपटॉप और कंप्यूटर चलाकर न केवल अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के विकास में योगदान कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री विकास योजनाओं का जिक्र कर यह बताने की कोशिश कर सकते हैं कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद विकास का पहिया तेजी से घूम रहा है। सड़क, पुल का ही नहीं बल्कि एलओसी तक पर्यटन को बढ़ाने की दिशा में काम हो रहा है। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।
कश्मीरी पंडितों के दर्द को भी कर सकते हैं साझा
प्रधानमंत्री विस्थापन का दंश झेल रहे कश्मीरी पंडितों के दर्द को भी साझा कर सकते हैं। सरकार की ओर से उनके लिए किए गए प्रयासों की जानकारी देते हुए यह बताने की कोशिश कर सकते हैं केंद्र में भाजपा सरकार के आने के बाद उनके आवास की दिशा में प्रगति हो या फिर नियुक्ति, सभी में तेजी आई है। केंद्र सरकार उनकी सुरक्षा से लेकर हर सुख-दुख में साथ है। वह यह भी जताने की कोशिश कर सकते हैं कि कश्मीरी पंडितों के बिना घाटी अधूरी है। कश्मीर को पहले की तरह आबाद करने में आम कश्मीरियों से सहयोग का भी आह्वान कर सकते हैं।
रैली पर सभी की निगाहें
अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में हो रही प्रधानमंत्री की रैली पर सभी की निगाहें हैं। चाहे वह आम नागरिक हो या फिर राजनीतिक दल। नेकां, पीडीपी, कांग्रेस समेत अन्य पार्टियां भी रैली में दिए गए संदेश पर निगाहें बनाए हुए हैं। राजनीतिक पार्टियों का मानना है कि उनकी रैली से कश्मीर के लोगों के दिलोदिमाग पर असर पड़ सकता है।