उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने प्रधानमंत्री मोदी को नए भारत और नए जम्मू-कश्मीर का शिल्पकार बताया है। पांच अगस्त, 2019 को सात दशकों की पीड़ा, अन्याय, अलगाववाद, आतंकवाद, भ्रष्टाचार से जम्मू-कश्मीर को मुक्त कर इसे सामाजिक-आर्थिक विकास के नए रोल मॉडल के रूप में विकसित किया है। जम्मू-कश्मीर में अगले चार महीनों में 20000 करोड़ रुपये की अन्य योजनाएं पूरी की जाएंगी। इसके साथ मार्च, 2025 तक लगभग 60000 करोड़ रुपये की अन्य परियोजनाएं पूरी करके आम नागरिकों के कल्याण एवं विकास के लिए समर्पित की जाएंगी।
एमए स्टेडियम में मंगलवार को रैली को संबोधित करते हुए एलजी ने कहा, पिछले पांच वर्ष में प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर में सामाजिक न्याय, समता और समावेशी विकास सुनिश्चित किया है। पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके), वेस्ट पाकिस्तानी शरणार्थियों को दशकों बाद सामाजिक न्याय मिला है और अब जमीन-जायदाद पर उनका मालिकाना हक सुनिश्चित किया जा रहा है।
पंचायतों, शहरी स्थानीय निकाय में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए सीटों का आरक्षण प्रदान किया गया है और समय पर इनके चुनाव सुनिश्चित होंगे। नारी शक्ति के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। औद्योगिकीकरण में जम्मू कश्मीर की तस्वीर बदली है। अब तक 90182 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। 14000 करोड़ रुपये से अधिक का औद्योगिक निवेश या तो जमीन पर रियलाइज हुआ है या उससे जुड़े प्रोजेक्ट पाइपलाइन में है जिन्हें तीव्र गति से शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। 46 नए औद्योगिक संपदा विकसित किए जा रहे हैं।
सरकारी नौकरियों में योग्यता के आधार पर 34000 से अधिक पदों पर भर्तियां की गई हैं और 12000 अन्य पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। 87000 से ज्यादा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर 8 लाख से अधिक महिलाएं उद्यमी बनी है। इस वित्त वर्ष में एक लाख से अधिक प्रोजेक्ट पूरे किए जाएंगे। आज 1100 से अधिक जन सेवाएं नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं।
5013 करोड़ रुपये की लागत से होलिस्टिक कृषि विकास कार्यक्रम के तहत 29 प्रोजेक्टों पर काम किया जा रहा है, जिससे 13 लाख परिवारों के जीवन में परिवर्तन आएगा। दावा किया कि आतंकी घटनाओं में 75 प्रतिशत कमी आई है। स्थानीय भर्ती समाप्त हो गया है। हड़ताल का कैलेंडर बंद हो गया है। प्रशासन अब शिक्षा व रोजगार का कैलेंडर प्रकाशित कर रहा है। पत्थरबाजी अब इतिहास की बात हो गई है। जम्मू और श्रीनगर शहर को शहरी सुधार के नए मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। आगामी दिनों में कठुआ, जम्मू, सांबा, रियासी, उधमपुर देश के अन्य औद्योगिक शहरों के समक्ष खड़े होंगे।