जम्मू में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों का प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए घाटी से बाहर स्थानांतरित किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को पूरी सुरक्षा देने में सरकार विफल रही है। वह कश्मीर में सुरक्षित महसूस नहीं करते हैं। इसी के चलते दो सौ दिनों से अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे हैं।
इससे पहले सोमवार को डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी के नेता कर्मचारियों से मिले थे। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने कश्मीर में अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए उचित कदम नहीं उठाए हैं। कर्मचारी कई महीने से धरना दे रहे हैं, लेकिन सरकार को उनकी कोई परवाह नहीं है।
वक्ताओं ने कहा कि पार्टी के चेयरमैन गुलाम नबी आजाद ने सत्ता में आने पर अल्पसंख्यक समुदाय की सम्मान और सुरक्षित पुनर्वास के लिए वादा किया है। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा कश्मीरी पंडितों के लिए पूरे देश में हल्ला कर रही है और चुनावी लाभ के लिए इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का मौका नहीं छोड़ रही।
डीएपी नेताओं ने कहा कि हम उनकी वापसी, पुनर्वास और उनके नुकसान के लिए पर्याप्त मुआवजे की मांग करते हैं। पार्टी उनके साथ खड़ी रहेगी और आवाज उठाएगी। कर्मचारियों का वेतन रोकना उनके साथ अन्याय है। डीएपी नेताओं में जीएम सरूरी, आरसी चिब, सलमान नाजमी, गौरव चोपड़ा, विशाल चोपड़ा, अश्विनी हांडा आदि मौजूद रहे।