संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। नटरंग की संडे थिएटर शृंखला में राहुल सिंह के निर्देशन में दंगों पर आधारित खराशें नाटक का मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से कलाकारों ने सांप्रदायिक सद्भाव और देशभक्ति की भावना को जगाया। प्रसिद्ध कवि और लेखक गुलजार की लिखीं तीन कहानियां रवि पार, हिल्सा और खुदा हाफिज भी प्रस्तुत की गईं।
रवि पार विभाजन के समय के भारत की कहानी है। दोनों पक्षों के धार्मिक कट्टरपंथियों ने अपने धर्म में विश्वास न करने वाले किसी भी व्यक्ति पर कोई दया नहीं दिखाई। विभाजन के बाद दर्शन सिंह और उनका परिवार पास के एक गुरुद्वारे में शरण लेता है। तमाम उथल-पुथल के बीच शाहनी ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया, लेकिन एक बहुत कमजोर था और उसके बचने की उम्मीद बहुत कम थी। इसी बीच दर्शन सिंह को भारत से एक विशेष ट्रेन के आने की खबर मिलती है, जो लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए आई है। दर्शन हड़बड़ी में स्टेशन पहुंचता है और उसे पता चलता है कि ट्रेन में बहुत भीड़ है। किसी तरह वह ट्रेन की छत पर खुद और परिवार के लिए जगह ढूंढता है। रात होने और ट्रेन के स्टेशन छोड़ने के बाद दर्शन सिंह ने देखा कि उनमें से एक बच्चा अब हिल नहीं रहा था और उसे ठंड लग रही थी, तब उसे अहसास हुआ कि बच्चा मर चुका है। जैसे ही ट्रेन रावी नदी के ऊपर से गुजरी, किसी ने दर्शन सिंह के कान में फुसफुसाया कि उसे मृत बच्चे को नदी में फेंक देना चाहिए।
असहाय महसूस करते हुए वह चुपचाप बच्चे को शाहनी से दूर ले जाता है और नदी में फेंक देता है। बच्चे को फेंकते समय वह रोने की आवाज सुनता है और चौंककर केवल शाहनी की ओर मुड़ता है और पाता है कि वह अभी भी मृत बच्चे को गले लगा रही है। नाटक में अभिनय करने वाले नटरंग कलाकारों में ब्रिजेश अवतार शर्मा, सुमित बंदराल, अमित ब्राह्मी, शेरयार सलारिया, वंदना ठाकुर शामिल थे।