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कठुआ: अधिकारी के सामने तीन कर्मचारियों ने किया आत्मदाह का प्रयास, पुलिस ने हिरासत में लिया

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कठुआ Updated Fri, 19 Jul 2019 01:46 AM IST
अस्थाई रूप से काम कर रहे कर्मियों ने आत्मदाह का प्रयास किया - फोटो : अमर उजाला
पीएचई विभाग में पिछले दो दशक से भी अधिक समय से अस्थाई रूप से काम कर रहे कर्मियों के सब्र का बांध आखिरकार वीरवार को टूट गया। उन्होंने विभाग के कार्यकारी अभियंता कार्यालय में अधिकारी के सामने ही केरोसिन छिड़क कर आत्मदाह का प्रयास किया। हंगामे के बीच एक अधिकारी ने जहां उन्हें आग लगाने से रोका तो वहीं मौके पर पहुंची पुलिस ने चारों अस्थाई कर्मियों को हिरासत में लेकर मामला दर्ज कर लिया है। पीएचई कर्मी पांच साल के वेतन और उनकी विभाग में स्थिति जानने को लेकर पिछले वर्ष सिंतबर माह से लगातार हड़ताल पर हैं। वहीं बीते माह में ही कर्मचारी लगातार दूसरी बार अनशन शुरू कर चुके हैं। 

वीरवार दोपहर उस समय जमकर हंगामा हो गया, जब पीएचई विभाग के कार्यकारी अभियंता से बातचीत करने पहुंचे चार में से तीन पीएचई दैनिक वेतनभोगियों ने देखते ही देखते शरीर पर केरोसिन छिड़क कर आत्मदाह की कोशिश की। मामला बिगड़ता देख विभाग के एक अधिकारी ने बीच बचाव करते हुए जबरन उन्हें ऐसा करने से रोका। इसके बाद उन्हें समझाने की भी कोशिश की गई। पीएचई कर्मी इसलिए भी नाराज थे कि उन्हें प्रशासन की ओर से बुधवार को कोई उचित जवाब नहीं मिला, जबकि उन्हें विभाग में बैक डोर इंट्री बताकर पल्ला झाड़ा जा रहा है। विभाग के कार्यकारी अभियंता से बहस के दौरान भी यह मामला भड़का हुआ था, जब अस्थाई कर्मियों ने आत्मदाह का प्रयास किया। उनकी पहचान नरेंद्र, बलविंद्र और कृष्ण चंद और चौथे की विशंभर के रूप में हुई है। उधर, सिटी पुलिस थाने में चारों पीएचई विभाग के अस्थाई कर्मियों के खिलाफ आरपीसी की धारा 309 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया। देर शाम आठ बजे के करीब मुचलका जमानत पर चारों को रिहा कर दिया गया। 

रोषित कर्मियों ने बंद किए कार्यालय के दरवाजे
आत्मदाय का प्रयास करने वाले पीएचई विभाग के अस्थाई कर्मियों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद अन्य साथियों का गुस्सा भड़क गया। उन्होंने जहां पुलिस और प्रशासन के साथ-साथ सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, वहीं पीएचई कार्यालय के विभिन्न दरवाजों को भी बंद कर दिया। दोपहर तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही, जिसके चलते पुलिस का पहरा भी कड़ा कर दिया गया। उन्होंने रोष जताते हुए कहा कि यह उनकी आवाज को दबाने का प्रयास है। पहले भी कई बार चेतावनी दी जा चुकी है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी उन्हें आश्वासन देकर मुकर जाते रहे हैं। आत्मदाह के अलावा अब उनके पास कोई भी दूसरा रास्ता नहीं बचा है। 
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बदहवासी, बेबसी और सरकार की चुप्पी से परेशान हैं दैनिक वेतनभोगी

इसे विडंबना ही कहेंगे कि लगभग दो दशकों से सैकड़ों पीएचई दैनिक वेतनभोगी जहां विभाग में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें कई-कई माह और साल तक वेतन नहीं मिलता है। सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने से लेकर परिवार के साथ मार्ग जाम करने, कभी बर्तन तो कभी अर्धनग्न अवस्था में अधिकारियों से मिल चुके हैं। यही नहीं मंत्रियों से लेकर अधिकारियों के दरवाजे खटखटाने के बाद भी उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है। धरने पर बैठे विभाग के अस्थाई कर्मियों ने बताया कि न तो कोई त्योहार उनके लिए है और न ही कोई मदद। बदहवासी इस बात की है कि परिवार के बुजुर्गों के लिए दवा का इंतजाम और बच्चों की इच्छाओं को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। सरकार की चुप्पी ने उन्हें इस कदर परेशान कर दिया है कि घर का चूल्हा भी दो वक्त नहीं जल पाता। उन्होंने इसके लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। 

विभाग में बड़े पैमाने पर बैक डोर इंट्रियों के लिए जिम्मेदार कौन ?
एक ओर जहां पीएचई विभाग में वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों की हालत बद से बदतर हो गई है। वहीं बड़ा सवाल यह है कि आखिर सरकार इनकी अस्थाई नियुक्तियों को जहां बैक डोर इंट्री बता रही है। वहीं इस बैक डोर इंट्री को अंजाम देने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। पीएचई विभाग के अस्थाई कर्मी भी वीरवार को यही सवाल पूछते दिखाई दिए कि आखिर बैक डोर इंट्री के लिए जिम्मेदार कौन है? और क्या विभाग में इतने साल उनकी सेवाओं के दौरान किसी को भी इन बैक डोर इंट्रियों की जानकारी नहीं थी। उन्होंने दो टूक कहा कि कर्मचारियों को वेतन न देकर परेशान करने की जगह सरकार उन अधिकारियों की भी निशानदेही करे जिन्होंने उनके भविष्य को बर्बाद कर दिया है।
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