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जम्मू में सर्वदलीय बैठक: बाहरी प्रदेशों के लोगों को जम्मू कश्मीर में मतदान का न मिले हक, सभी दलों ने उठाई आवाज

Sat, 10 Sep 2022 05:52 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

सर्वदलीय बैठक में पीडीपी, अवामी नेशनल कांफ्रेंस, सीपीआई पहले से ही गुपकार गठबंधन के घटक के तौर पर बैठकों में हिस्सा लेते रहे हैं। शनिवार को हुई बैठक में कांग्रेस ने भी हिस्सा लिया था। 
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जम्मू में सर्वदलीय बैठक के दौरान नेता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर में बाहरी मतदाताओं को वोटर बनाए जाने के खिलाफ लड़ाई के लिए पीएजीडी, कांग्रेस समेत 10 दल एक मंच पर आ गए हैं। पीएजीडी प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला की ओर से बुलाई गई बैठक में सर्वसम्मति से फैसला किया गया कि बाहरी वोटर किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसके लिए लंबी लड़ाई लड़ी जाएगी। भविष्य की रणनीति और आंदोलन की रूपरेखा तय करने के लिए एक समिति गठित करने का भी फैसला किया गया।

बाहरियों को मतदाता बनाने के फैसले का विरोध

यह समिति इस मुद्दे पर कानूनी, राजनीतिक और सामाजिक पहलुओं पर काम करेगी। इसमें सभी दलों के एक प्रतिनिधि को शामिल किया जाएगा।  पीएजीडी में शामिल पांच दलों-नेकां, पीडीपी, सीपीआई (एम), सीपीआई व अवामी नेशनल कांफ्रेंस, कांग्रेस के साथ ही जम्मू आधारित पार्टियां डोगरा स्वाभिमान संगठन, डोगरा सदर सभा, शिवसेना बाला साहेब, जम्मू वेस्ट असेंबली मूवमेंट ने सर्वदलीय बैठक में शामिल होकर बाहरियों को मतदाता बनाने के फैसले का विरोध किया। भठिंडी स्थित नेकां अध्यक्ष फारूक के आवास पर बैठक के बाद फैसलों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में गैर स्थानीय वोटरों के मताधिकार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जम्मू-कश्मीर आज मुसीबत में है

भाजपा चुनाव से पहले ही जीतने के दावे कर रही है और इसके लिए सभी हथकंडे अपना रही है। यहां के लोगों का हक छीना जा रहा है। जम्मू-कश्मीर आज मुसीबत में है। बाहर के लोगों को हक देने की कोशिशें की जा रही हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर सभी दल अपनी विचारधारा से हटकर एक मंच पर इकट्ठे हुए हैं। मुख्य चुनाव अधिकारी हृदेश कुमार ने पहले कहा था कि जम्मू-कश्मीर में 22 से 25 लाख नए मतदाता होंगे, फिर कहा डेढ़ से दो लाख होंगे। हमें अब विश्वास नहीं है। भाजपा का मकसद किसी भी तरह यहां चुनाव जीतना है, लेकिन लोकतंत्र में लोग ही फैसला करेंगे। 

समिति बनाने का प्रस्ताव रखा

सर्वदलीय बैठक में डोगरा सदर सभा के अध्यक्ष गुलचैन सिंह चाढ़क ने एक समिति बनाने का प्रस्ताव रखा, जिसे पारित किया गया। बैठक में गुपकार गठबंधन से पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, अवामी नेशनल कान्फ्रेंस के मुजफ्फर शाह, सीपीआई (एम) के मोहम्मद यूसुफ तारिगामी के अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विकार रसूल वानी, कार्यकारी अध्यक्ष रमण भल्ला, डोगरा स्वाभिमान संगठन के चौधरी लाल सिंह, मिशन स्टेटहुड के अध्यक्ष सुनील डिंपल, शिव सेना बाला साहेब ठाकरे के अध्यक्ष मुनीश साहनी, अन्य दल और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

न तो दिल और दिल्ली की दूरी खत्म हुई न मिला राज्य का दर्जा 

फारूक ने कहा कि सभी सरकारी व लोकतांत्रिक संस्थान ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने 5 अगस्त 2019 से पहले दावा किया था कि जम्मू-कश्मीर में कुछ नहीं होने वाला, लेकिन देश-दुनिया ने वह सब कुछ देखा जो पांच अगस्त को हुआ। प्रधानमंत्री के साथ भी बैठक हुई थी जिसमें भरोसा दिलाया गया था कि दिल और दिल्ली की दूरी खत्म होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस देने का वादा पूरा नहीं किया गया। हर दिन प्रदेशवासियों पर नए-नए कानून थोपे जा रहे हैं। अधिकारों पर हमला हो रहा है। इस हमले से निपटने के लिए हम सभी एकजुट हुए हैं। 

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