-26 करोड़ तक की देनदारी होने से कई अस्पतालों ने चिकित्सा सेवाएं देने से हाथ खड़े किए
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। आयुष्मान गोल्डन कार्ड होने के बावजूद मरीजों को निजी अस्पतालों में इलाज के लिए दरबदर होना पड़ रहा है। स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 26 करोड़ रुपये तक की देनदारी बन जाने से ऐसे कई अस्पतालों ने चिकित्सा सेवाएं देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। बीमा योजना के तहत 133 निजी अस्पताल सूचीबद्ध किए गए हैं।
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) और एबी पीएम-जेएवाई-सेहत बीमा योजना के तहत प्रति परिवार को सालाना पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में तो बीमा योजना जारी है लेकिन कई निजी अस्पतालों ने हाथ पीछे खींच लिए हैं। कारण करोड़ों रुपये की देनदारी बन जाने से उनके लिए भी महंगी चिकित्सा सेवाएं देना मुश्किल हो रहा है।
बीमा योजना के तहत बड़ी संख्या में मरीज बेहतर इलाज पाने के लिए निजी अस्पतालों में जा रहे हैं, लेकिन उन्हें यह कहकर लौटा दिया जा रहा है कि हमारी करोड़ों रुपये की देनदारी का भुगतान न होने से हम चिकित्सा सेवाएं देने में सक्षम नहीं है। उनका तर्क है कि मरीज के इलाज के दौरान संबंधित डाॅक्टर को फीस, लेबोरेटरी परीक्षण, बिस्तर व अन्य जांच का शुल्क का दबाव बढ़ जाता है। सूत्रों के अनुसार तीन साल के लिए बीमा कंपनी के साथ सेहत बीमा योजना पर अनुबंध किया जाता है।
अंतिम बीमा कंपनी द्वारा मार्च 2025 तक सेवाएं दी जानी हैं लेकिन कंपनी ने दो साल बाद ही सेवाएं बंद कर दी हैं। इससे लगातार सरकारी और निजी अस्पतालों की देनदारी बढ़ रही है। सरकारी अस्पतालों में तो अभी सेवाएं जारी रखी गई हैं मगर कई निजी अस्पताल सेवाएं देने से मना कर रहे हैं। बताया जाता है कि इस साल एक नई बीमा योजना आने के बाद ही यह समस्या आई है जिसमें भुगतान नहीं हो पा रहा है। तीन साल के अनुबंध में हर साल बीमा योजना का संशोधन किया जाता है।
निजी अस्पतालों में परेशानी आने तो समर्पित नंबर पर सूचित करें
सेहत बीमा योजना के तहत अगर कोई निजी अस्पताल चिकित्सा सेवाएं देने से मना कर रहा है तो मरीजों को राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) के समर्पित नंबरों पर सूचित करना चाहिए। हमने निजी अस्पताल प्रबंधकों को सेवाएं जारी रखने को कहा है। हमने आश्वासन दिया है कि निजी अस्पतालों को शीघ्र भुगतान हो जाएगा। बीमा कंपनी के साथ न्यायालय में मामला विचाराधीन है। उम्मीद है जल्द हमारे हक में फैसला आएगा। कंपनी के साथ तीन साल का अनुबंध है, लेकिन उसने दो साल बाद ही सेवाएं देना बंद कर दिया है।
संजीव एम गाडकर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), राज्य स्वास्थ्य एजेंसी जम्मू कश्मीर
133 निजी सूचीबद्ध स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता अस्पताल
एसएचए से मिली जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में सेहत बीमा योजना के तहत 250 सूचीबद्ध स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता अस्पताल हैं। इनमें 117 पब्लिक और 133 निजी अस्पताल हैं। इसमें 10104488 लाभार्थी, कुल पूर्व प्राधिकरण अनुरोध 1349746, 8558171 लोगों को आयुष्मान कार्ड जारी, 1310019 दावे पेश, 82 प्रतिशत तक दावों के निपटान का दावा किया गया है।