अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शहर के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी केंद्रों पर मरीजों की कतार खत्म करने के लिए आभा (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) के तहत ऑनलाइन ओपीडी पंजीकरण की पहल शुरू की गई। इसके बावजूद निरक्षर और बिना स्मार्ट फोन वाले लोग परेशान हैं। हालांकि मदद के लिए स्टाफ है, लेकिन इन लोगों के लिए नई व्यवस्था अभी पहेली बनी है।
नई व्यवस्था के तहत ओपीडी के लिए मरीज को पहले स्मार्ट फोन पर आभा एप लोड करनी है। मोबाइल नंबर पंजीकृत करने पर ओटीपी आएगा। नाम, उम्र, पिन कोड, राज्य, जिला, ईमेल, आधार आदि का ब्योरा देना होगा। इसके बाद आईडी सृजित कर पासवर्ड दिया जाता है और संबंधित अस्पताल के क्यूआर कोड पर स्कैन कर टोकन मिलता है, जिसे ओपीडी केंद्र पर दिखाने पर डॉक्टर की पर्ची जारी होती है, लेकिन निरक्षर और बिना स्मार्ट फोन वाले लोगों के लिए नई व्यवस्था सरल नहीं दिख रही।
जागरूकता की कमी के कारण बढ़ रही परेशानी
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में मंगलवार को आए नगरोटा निवासी खुशी मोहम्मद ने बताया कि एप के बारे में जानकारी नहीं है। उनके पास स्मार्ट फोन भी नहीं है। साथ आए तीमारदार ने ही प्रक्रिया पूरी की है। नगरोटा से ही शेर मोहम्मद ने बताया- स्टाफ ने एप के बारे में जानकारी दी, जिसके बाद उन्होंने अकाउंट बनाया। न्यूरो विभाग में आए बनिहाल निवासी नजीर अहमद ने बताया कि नई व्यवस्था अच्छी है, लेकिन अभी पता नहीं चला कि इसे कैसे करना है। लोगों को पहले पर्याप्त जानकारी दी जानी चाहिए। यूरोलाजी विभाग में दिखाने आए उधमपुर निवासी राज कुमार ने कहा कि ओपीडी केंद्र पर पहुंचकर आभा के बारे में पता चला। बनतालाब निवासी राजेंद्र सिंह ने कहा कि अभी तो स्टाफ सहयोग कर रहा है, लेकिन भविष्य में ऐसे स्टाफ के हटने से नए मरीजों के लिए परेशानी बढ़ेगी। पंजग्राई नगरोटा निवासी बशीर अहमद ने बताया कि उन्हें पास स्मार्ट फोन नहीं है और स्टाफ ने अपने फोन से अकाउंट बनाया है। वह पढ़ना-लिखना नहीं जानते।
व्यवस्था से फायदे के दावे
अकाउंट सृजित होने के बाद मरीज का स्वास्थ्य रिकॉर्ड रहेगा, जिससे वह कहीं भी जाकर बेहतर इलाज पा सकता है। मरीज को चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा टेली परामर्श की सुविधा मिलेगी। ओपीडी में लाइनों में खड़े रहने की जरूरत नहीं, टोकन पाकर सीधे पर्ची पाएं। पूरी प्रक्रिया पेपरलेस होगी, जिससे मरीज को परेशानी मुक्त स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी।