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Jammu News: नीति का पालन नहीं, वाहनों में स्कूली बच्चे असुरक्षित

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- चुआदी में बुधवार स्कूली बच्चों से भरी वैन के हादसाग्रस्त होने के बाद न स्कूल शिक्षा विभाग जागा और न ही परिवहन विभाग
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- वीरवार को वैसे ही हालात दिखे, एक वैन में बैठा रखे थे 20 स्कूली बच्चे
- निजी स्कूलों के पास अपनी परिवहन सुविधा नहीं, अभिभावक प्राइवेट वैन और ऑटो के सहारे

अमर उजाला पड़ताल का लोगो लगाएं


अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जिन प्राइवेट वैन और ऑटो में आप अपने बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं क्या वह सुरक्षित स्कूल वाहन नीति के तहत परिचालन करते हैं ? इसे जानना स्कूल प्रबंधन, स्कूल शिक्षा विभाग और परिवहन विभाग ने तो जरूरी नहीं समझा, लेकिन अभिभावक भी इस पर खामोश हैं। प्राइवेट वैन में बच्चों को जानवरों की तरह ठूंसा जा रहा है। सात लोगों की क्षमता वाली वैन में 20 बच्चों को भरा जा रहा है। इस पर संबंधित विभाग भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे।
बुधवार को शहर के चुआदी में स्कूली बच्चों को लेकर जा रही वैन अनियंत्रित होकर खंभे से जा टकराई जिसमें 12 बच्चों को मामूली चोटें आई थीं। इस हादसे के बाद भी न स्कूल शिक्षा विभाग और न परिवहन विभाग जागा। वीरवार को भी वैसे ही हालात दिखे। एक वैन में 15 से 20 बच्चे जबकि ऑटो में 10 से 12 बच्चे बैठाए गए थे। यह वैन व ऑटो-रिक्शा सुरक्षित स्कूल वाहन नीति का पालन नहीं कर रहे। इनमें सुरक्षा के जरूरी उपकरण नहीं हैं। वैन में न कैमरे व जीपीएस है। ऐसे में स्कूली बच्चों विशेषकर छात्राओं की सुरक्षा की गारंटी कौन लगेगा। स्कूल प्रबंधनों के पास इन वैनों व ऑटो चालकों की जानकारी तक नहीं है। अमर उजाला ने वीरवार दोपहर 12:30 बजे से शहर के तीन बड़े स्कूलों की परिवहन सुविधा की पड़ताल की। गांधी नगर के एक निजी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के पास खुद के परिवहन साधन ही नहीं हैं। बच्चे वैन और ऑटो में ओवरलोडिंग झेलते हैं। इन वाहनों के चालक और कंडक्टर का सत्यापन स्कूल रिकार्ड में नहीं है। स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को खुद से परिवहन व्यवस्था करने को कहता है। ऐसा ही हाल एक अन्य नामी निजी स्कूल का था। स्कूल के पास अपना परिवहन का साधन तो है, लेकिन फिर भी बड़ी संख्या में प्राइवेट वैन और ऑटो लगे हुए हैं। शहर के हर स्कूल की लगभग यही स्थिति है।
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अभिभावक बोले-स्कूल कहता है अपनी व्यवस्था खुद करो
गांधीनगर के एक निजी स्कूल में पढ़ने वाले एक बच्चे के अभिभावक ने कहा कि स्कूल के पास परिवहन का साधन नहीं है। प्रबंधन से कई बार इसकी मांग की, लेकिन कोई हल नहीं निकला। निजी वैन चालक एक बच्चे का प्रतिमाह का 2700 रुपये किराया लेता है। वैन में क्षमता से ज्यादा से बच्चों को बैठाया जाता है। अगर इसका विरोध करें तो वैन चालक बच्चे को स्कूल छोड़ने से ही मना करता है। अगर स्कूल प्रबंधन के पास अपना परिवहन साधन हो तो ये परेशानी नहीं आती।
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पहले चेतावनी देंगे, न माने तो होगी कार्रवाई : डीसी
मेरे संज्ञान में ये समस्या है। हाल ही में हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया गया था। एक सप्ताह का समय दीजिए। पहले नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों को चेतावनी दी जाएगी, अगर वे फिर भी न सुधरे तो बनती कार्रवाई की जाएगी।
-सचिन कुमार वैश्य, डिप्टी कमिश्नर, जम्मू
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