राजोरी व पुंछ जिले में सड़कों पर दौड़ रहे रहे वाहनों में स्पीड गवर्नर नहीं है, इसके कारण अंधाधुंध दौड़ रहे वाहन हादसे का शिकार हो रहे हैं। यात्री वाहनों की गति नियंत्रित करने और सड़क हादसों से बचने के लिए परिवहन विभाग ने कुछ साल पहले यात्री वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाना शुरू किए थे, लेकिन चालकों की लापरवाही यात्रियों पर भारी पड़ रही है। अधिकारियों के अनुसार वाहन को पास करवाते समय स्पीड गवर्नर लगाए जाते हैं, लेकिन बाद में इन्हें उतार दिया जाता है।
परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अकसर ऐसा देखा गया है कि जब कोई भी यात्री वाहन फिटनेस पास करवाने के लिए आता है तो उसमें स्पीड गवर्नर लगा होता है। बाद में चालक इसे उतार देते हैं। नियमों का सरेआम उल्लंघन किया जा रहा है, बावजूद इसके कोई जांच नहीं होती। कई बार परिवहन विभाग के अधिकारी या ट्रैफिक पुलिस कर्मी वाहन की जांच करते समय स्पीड गवर्नर की जांच ही नहीं करते। इस कारण चालक मनमर्जी से वाहन दौड़ा रहे हैं। वीरवार को राजोरी के देरी रल्योट में हुए हादसे की शिकार बस में भी स्पीड गवर्नर नहीं था। अगर होता तो शायद हादसा जाता।
हाईवे पर चलने वाले वाहनों में स्पीड गवर्नर लगा हो तो गति 80 किलोमीटर प्रति घंटे से ऊपर नहीं जाती है। पहाड़ी इलाकों में यह गति 60 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है। बिना स्पीड गवर्नर के वाहन को पास नहीं किया जाता है। यह लगवाना अनिवार्य है।
- शम्मी शर्मा, सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, यातायात विभाग।
यातायात कर्मचारी हर वाहन में जांच करते हैं। यदि किसी वाहन में कमी रहती है तो चालान किया जाता है। लेकिन स्पीड गवर्नर की जांच होती है कि नहीं इस बारे में कुछ नहीं बता पाए।
-आफताब अहमद, डीएसपी ट्रैफिक, राजोरी-पुंछ।