संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। नटरंग ने संडे थिएटर शृंखला में रविवार को दंगों पर आधारित खराशें नाटक का मंचन किया। प्रसिद्ध लेखक गुलजार की कथानक पर तीन अलग-अलग कहानियों को प्रस्तुत किया गया, जिनमें रावी पार, हिल्सा और खुदा हाफिज शामिल है।
रावी पार विभाजन के समय के भारत की कहानी है। विभाजन के बाद दर्शन सिंह और उनके परिवार ने गुरुद्वारे में शरण ली। तमाम उथल-पुथल के बीच शाहनी ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया, लेकिन एक कमजोर था जिसके बचने की संभावना कम थी। इस बीच दर्शन सिंह को भारत से विशेष ट्रेन के आने की खबर मिलती है। वह हड़बड़ी में स्टेशन पहुंचते हैं तो पता चलता है कि ट्रेन में अत्यधिक भीड़ है। किसी तरह उन्हें छत पर परिवार के लिए कुछ जगह मिल जाती है। रात में दर्शन सिंह को अहसास हुआ कि एक बच्चा मर गया है। किसी ने दर्शन सिंह के कान में फुसफुसाया कि मृत बच्चे को रावी नदी में फेंक देना चाहिए। असहाय महसूस करते हुए वह चुपचाप बच्चे को शाहनी से दूर ले जाता है और नदी में फेंक देता है।
हिल्सा की कहानी बंगाली जोड़े के घर से शुरू होती है, जहां कंचन मछली साफ कर रही है। उसका पति भिभूति खाली हाथ बाजार से लौटता है, लेकिन किसी तरह अखबार घर पहुंच गया, जो दंगों के वीभत्स परिणाम की खबरों और तस्वीरों से भरा था। यह एक ऐसी गर्भवती की हृदय विदारक कहानी थी, जिसके साथ बलात्कार हुआ था और उसकी मृत्यु हो गई। लेखक ने लड़की के दर्द को सूक्ष्मता और खूबसूरती से हिल्सा मछली के दर्द से जोड़ा। खुदा हाफिज में कर्फ्यू के आदेश का उल्लंघन करने वाले दो व्यक्तियों की घबराहट दिखाई गई है।
कलाकारों में ब्रिजेश अवतार शर्मा, संकेत भगत, सुमित सिंह बंदराल और वंदना ठाकुर शामिल थे। नाटक का निर्देशन राहुल सिंह, रोशनी राहुल सिंह द्वारा डिजाइन और संगीत कुशल भट्ट द्वारा प्रस्तुत किया गया था। प्रस्तुतियां विशाल शर्मा और शो का संचालन मोहम्मद यासीन द्वारा किया गया।
सरायअकिल कस्बे में सुजीत कुमार की मौत के बाद रोते बिलखते परिजन। संवाद