देश-विदेश से धर्मार्थ गतिविधियों के नाम पर पैसा इकट्ठा कर उसका आतंकी आर्थिक मदद में इस्तेमाल करने के मामले में एनआईए ने बुधवार को घाटी में 10 स्थानों पर छापा मारा। यह छापा कुछ एनजीओ और ट्रस्ट से जुड़े लोगों के ठिकाने पर मारा गया।
एनआईए के पास शिकायत थी कि कुछ एनजीओ और ट्रस्ट पैसा इकट्ठा कर उसका इस्तेमाल अलगाववादी गतिविधियों और आतंकियों को मदद करने में करते हैं। छापे के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रानिक गैजेट तथा अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है।
एनआईए के एक अधिकारी ने बताया कि बुधवार को एजेंसी की विभिन्न टीमों द्वारा श्रीनगर में 9, बांदीपोरा व बंगलूरू में एक-एक स्थानों पर छापामारी की गई। एजेंसी को जानकारी मिली थी कि घाटी में कुछ एनजीओ और ट्रस्ट धर्मार्थ गतिविधियों के नाम पर देश और विदेश से पैसा जुटाते हैं।
इसी पैसों से बाद में अलगाववादी और आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंडिंग की जाती है। इस संबंध में एनआईए ने आठ अक्तूबर को भारतीय दंड संहिता और यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
इनके ठिकानों पर हुई कार्रवाई
जिन लोगों के ठिकानों पर छापामारी की गई उनमें जेएंडके कोयलेशन ऑफ सिविल सोसाइटी के कोआर्डिनेटर खुर्रम परवेज का घर और दफ्तर शामिल है। इसके अलावा खुर्रम के अन्य साथी परवेज अहमद बुखारी, परवेज अहमद मट्टा और बंगलूरू की स्वाति शिसादरी के घर और दफ्तरों पर भी छापामारी की गई।
अधिकारी ने बताया कि एसोशिएशन ऑफ डिसअपीयर्ड पर्सन्स (एपीडीपी) की अध्यक्ष परवीना अहंगर के घर के साथ साथ अथरोट (एनजीओ) पर भी कार्रवाई की गई। इसके साथ ही श्रीनगर के एक प्रमुख अंग्रेजी दैनिक के ट्रस्ट पर भी छापामारी हुई।
अज्ञात दानदाताओं से लेते थे राशि
एनआईए अधिकारी ने बताया कि इन छापों के दौरान कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रानिक गैजेट भी जब्त किए गए जिन्हें जांच के लिए साथ लिया गया। मामले में आगे की तफ्तीश जारी है। अज्ञात दानदाताओं से राशि दान में लेकर इनका बाद में आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
वर्ष 2000 में भी तीन एनजीओ पर हुई थी कार्रवाई
वर्ष 2000 में भी एनआईए ने तीन एनजीओ के खिलाफ कार्रवाई की थी। ये एनजीओ जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों की फंडिंग करने में शामिल पाए गए थे।