रियासी। श्री सनातन धर्म सभा में जारी श्री शिव महापुराण कथा में शुक्रवार को सूरज कौशल शास्त्री ने भगवान श्री गणेश जी के विवाह का प्रसंग सुना संगत को निहाल किया। शास्त्री जी ने कहा कि भगवान शिव और पार्वती के मन में कुमार कार्तिकेय व गणेश जी का विवाह करने का विचार आया। दोनों यह जान कर आपस में झगड़ा करने लगे कि पहले विवाह कौन करेगा। विवाद ज्यादा होते देख शिव-पार्वती ने कहा कि जो पृथ्वी की परिक्रमा कर सबसे पहले लौटेगा, उसी का विवाह पहले होगा। यह सुन कर कार्तिकेय पृथ्वी की परिक्रमा करने निकल गए, लेकिन गणेश जी ने वहीं पर खड़े होकर शिव पार्वती को आसन पर विराजमान कर उनकी सात परिक्रमा कर ली। शिव-पार्वती गणेश जी की बुद्धिमता पर प्रसन्न हुए और प्रजापति की कन्या सिद्धि बुद्धि से उनका विवाह निश्चित कर दिया। गणेश जी के विवाह में भी सभी देवतागण शामिल हुए। पृथ्वी की परिक्रमा को निकले कार्तिकेय को नारद जी ने गणेश जी के विवाह के बारे में बताया। इसके कार्तिकेय माता-पिता को प्रणाम कर क्रौंच पर्वत पर तपस्या करने निकल गए। शुक्रवार को कथा का समापन आरती के साथ किया गया। बाद में सभी को प्रसाद भी बांटा गया। संवाद