संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। जवानों की सुरक्षा और दीर्घायु के लिए आयोजित भागवत कथा के सातवें दिन मृदुल वक्ता श्री कृपा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। साथ ही लोगों से भगवान श्रीकृष्ण के विशुद्ध प्रेम का अनुसरण करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि भारतवर्ष में ऐसी कोई मां नहीं होगी, जिसने अपने बच्चे को कभी कान्हा कह कर न पुकारा हो। कन्हैया ने अपनी बाल लीलाओं से सुंदर संदेश दिया है। उनके अपने घर नौ लाख गायें थीं, फिर भी वे गोपियों के यहां माक्खन खाने जाया करते थे। नंगे पांव वे बछड़ों और गायों के पीछे-पीछे भागा करते थे। उसी कन्हैया के देश में गौसेवा करने वाले लोग बहुत कम हो गए हैं। यहां दूध-दही की नदियां बहा करती थीं। परन्तु आज उसी देश में शराब की कितनी दुकानें खुल गई हैं। उन्होंने बताया कि कृष्ण के जीवन से हमें प्रेम सीखना चाहिए। कृष्ण ने विशुद्ध प्रेम दुनिया को सिखाया। उन्होंने हर किसी से प्रेम किया। जहां तक कि उन्हें मारने की भावना से आये पूतना आदि राक्षसों का भी उद्धार कृष्ण ने कर दिया। कृष्ण ने न किसी से राग किया और न द्वेष। उन्होंने सच्चे प्रेम, त्याग और समर्पण की शिक्षा ही दी।कथा के समापन के बाद आरती का आयोजन किया गया और उसके बाद आई हुई संगत को प्रसाद दिया गया