कठिनाई को भांपते हुए सरपंच साजिद मीर ने न केवल सड़क निर्माण के लिए बजट से 4.6 लाख रुपये आवंटित किए, बल्कि समुदाय के 150 ग्रामीणों को भी मदद करने के लिए कहा। मीर ने कहा कि यह हमारी संस्कृति है और ये हमारे मूल्य हैं जो हमें विरासत में मिले हैं। यही कारण है कि हम उन लोगों के नापाक मंसूबों के शिकार नहीं हुए जो हमें धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश करते हैं।
कहा कि आज हमने फिर से दिखाया है कि हम एकजुट हैं। दोनों समुदायों के स्वयंसेवकों ने चार दिनों में मूर्तियों को मंदिर तक ले जाने के लिए मशीनों और रस्सियों का इस्तेमाल किया। वहीं मंदिर समिति मुस्लिम पड़ोसियों के काम की प्रशंसा कर रही है।