जम्मू के उपजिला आरएस पुरा के गांव सतराइयां खुर्द में सोमवार को एक पानी की मोटर मां और बेटे की जिंदगी निगल गई। मोटर में करंट आने से सुबह मां की मौत हुई। जब मां की मौत की अस्पताल में पुष्टि हुई और सभी शोक मनाने लगे तो दोपहर में बेटे को भी उसी मोटर से करंट लग गया। कुछ घंटों के अंतराल में एक घर से दो शवयात्राएं निकलने से पूरे इलाके में शोक है।
बताया जा रहा है कि सकंध्या देवी (61) पत्नी राजेंद्र सिंह सुबह जब स्नान करने के लिए गईं तो पानी की मोटर चालू करते समय उन्हें करंट लग गया। घर में मौजूद बेटे दीपक सिंह (38) ने उन्हें काफी देर तक बाहर निकलते नहीं देखा तो अंदर पहुंच गया। वहां देखा तो मां जमीन पर पड़ी थीं। सोचा कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा होगा। तो उन्हें लेकर उप जिला अस्पताल पहुंचे। दीपक ने अन्य परिजनों व आसपास के लोगों को जानकारी दी। यहां डॉक्टर महिला की हालत का पता नहीं लगा पाए। तब परिजन उन्हें एक गैर सरकारी अस्पताल में ले गए। वहां डॉक्टरों ने जांचकर महिला को मृत लाया घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन शव को लेकर घर पहुंचे, तो गांव में चीख पुकार शुरू हो गई।
इस दौरान सेना में कार्यरत दीपक सिंह घर के अंगन में लगे हैंडपंप पर हाथ धोने पहुंचा। तब दीपक भी पानी की मोटर का इस्तेमाल करते समय करंट की चपेट में आ गया और मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि हैंडपंप के साथ बिजली वाली मोटर भी लगाई थी, जो रविवार रात बारिश होने के कारण शॉर्ट हो गई थी। इससे उसमें करंट आ रहा था। परिजनों ने दीपक को भी उपजिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित करते हुए कहा कि उसकी जान करंट से गई है। अस्पताल प्रबंधन ने शव का पोस्टमार्टम करवाया और परिजनों को सौंप दिया।
सेना का जवान था दीपक, छुट्टी पर आया था घर
बताया जा रहा है कि दीपक सिंह सेना की सिग्नल रेजिमेंट में कलकत्ता में तैनात था। 25 दिनों से वह छुट्टी पर घर आया था। तीन माह बाद वह सेवानिवृत होने वाला था। लेकिन, इस अनहोनी के बाद आठ साल की एक बेटी और 18 दिन के बेटे को पत्नी के भरोसे छोड़ गया। दोनों की मौत के बाद गांव में शोक की लहर है। गांव की सरपंच बीना देवी ने बताया कि दोनों मां-बेटे स्वभाव से बहुत अच्छे थे। सकंध्या देवी तो प्रतिदिन की तरह मंदिर जाने के लिए नहाने गई थीं। तब उनकी मौत हुई।
मां की मौत का कारण पता होता तो बच सकती थी बेटे की जान
परिजनों का कहना है कि अगर सकंध्या देवी की मौत का कारण पता चलता तो हो सकता है कि दीपक की जान बच जाती। दीपक के पिता सेवानिवृत्त सैनिक हैं, और बडा भाई भी नेवी में कार्यरत था। अब सेवानिवृत होकर घर पर ही है। इन दोनों का अंतिम संस्कार गांव के श्मशान घाट में शाम को कर दिया गया। हर किसी की एक साथ मां-बेटे का संस्कार होने पर आंखें नम थीं।