जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को पुनर्जीवित करने के मंसूबों पर सेना के खुफिया तंत्र की सटीक सूचनाएं भारी पड़ रही हैं। हाल के दिनों में एक के बाद एक कर आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों का भंडाफोड़ किया जा चुका है। इसमें जम्मू-कश्मीर पुलिस के पास ऐन मौके पर सेना की ओर से सूचनाएं पहुंचीं, जिस पर आतंकियों के सफाए से लेकर आतंकियों को पकड़ने और विस्फोट व हथियार बरामद करने में कामयाबी मिल पाई। सैन्य सूचनाओं ने कई बड़ी वारदातों को टाल दिया।
हाल की घटनाओं में सेना के खुफिया तंत्र ने अपनी सक्रियता को दर्शाया है, लेकिन पुलिस तंत्र के सामने कुछ सवाल भी खड़े किए हैं। खासकर चिनाब घाटी के किश्तवाड़, डोडा और रामबन जिलों में एक आतंकी ने 12 आतंकियों का नेटवर्क खड़ा कर दिया, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लग पाई। किश्तवाड़ में आतंक को दोबारा जिंदा करने वाला 50 साल से अधिक आयु वाला आतंकी मोहम्मद अमीन उर्फ जहांगीर सरूरी अभी भी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा है।