जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न्स के मासिक स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग को लेकर चल रहा गतिरोध आखिरकार आधिकारिक लिखित आदेश जारी होने के बाद समाप्त हो गया है। सरकार द्वारा मानदेय को 12,300 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने का औपचारिक आदेश सामने आने के बाद ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएमएसए) ने अपनी हड़ताल वापस लेने की घोषणा कर दी है।
इससे पहले बुधवार सुबह से ही जम्मू-कश्मीर के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों (जीएमसी) और स्किम्स बेमिना में मेडिकल इंटर्न्स का प्रदर्शन लगातार जारी था। इंटर्न्स का साफ तौर पर कहना था कि जब तक सरकार की तरफ से स्टाइपेंड बढ़ोतरी का कोई पुख्ता और लिखित आदेश हाथ में नहीं आ जाता, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन और हड़ताल यूं ही जारी रहेगी। एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया था कि वे केवल मौखिक आश्वासनों या फोन कॉल के भरोसे अपना आंदोलन खत्म नहीं करेंगे।
एसोसिएशन ने बताया था कि भले ही प्रशासन और अधिकारियों की ओर से उन्हें सकारात्मक संकेत मिले थे, लेकिन अतीत के अनुभवों को देखते हुए बिना लिखित आदेश के हड़ताल समाप्त करना संभव नहीं था। 'नो रिटन ऑर्डर, नो एंड टू प्रोटेस्ट' के नारे के साथ इंटर्न्स ने अपने रुख को पूरी तरह से मजबूत रखा था।
हालांकि, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा 21 अक्टूबर को इस संबंध में औपचारिक सरकारी आदेश जारी किए जाने और फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स (एफएमजी) समेत सभी इंटर्न्स को 1 अक्टूबर 2026 से 25,000 रुपये मासिक स्टाइपेंड मिलने की पुष्टि होने के बाद स्थिति बदल गई। लिखित आदेश के सार्वजनिक होते ही एआईएमएसए ने हड़ताल समाप्त करने का ऐलान कर दिया।
आंदोलन समाप्त होने के बाद एआईएमएसए जम्मू कश्मीर के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मोमिन खान और अन्य पदाधिकारियों ने इस ऐतिहासिक जीत पर खुशी जताई। उन्होंने इस मांग का समर्थन करने वाले मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं—जिनमें आगा रुहुल्ला, वहीद पर्रा, साजिद यूसुफ शाह, नासिर सोगामी, अल्ताफ बुखारी, सुनील शर्मा शामिल हैं—तथा सभी अधिकारियों और नौक्सरशाहों का आभार व्यक्त किया। साथ ही, इस संघर्ष को सफल बनाने वाले सभी इंटर्न्स और प्रतिनिधियों की एकजुटता की सराहना की।
विशेष रूप से जीएमसी श्रीनगर के डॉ. दानिश अली, डॉ. फरहान और जीएमसी राजौरी के डॉ. जबरान खान सहित संघर्ष में डटे रहे सभी मेडिकल छात्रों के अथक प्रयासों को इस जीत का श्रेय दिया गया। हालांकि, इंटर्न्स की यह मांग पूरी होने के साथ ही एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अब उनका अगला ध्यान रेजिडेंट डॉक्टरों के मानदेय को सुधारने पर रहेगा, ताकि देश के अन्य राज्यों की तर्ज पर यहाँ भी पीजी डॉक्टरों को उचित वेतन मिल सके।