अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। एमसीएच (जच्चा बच्चा) गांधीनगर में अगले सप्ताह से नया नियोनेटल यूनिट शुरू करने की तैयारी है। इसमें संभाग भर से एक माह से कम आयु वाले बच्चों को उपचार दिया जाएगा। इसके लिए बिस्तरों की संख्या दोगुनी कर 150 की जा रही है। ग्राउंड फ्लोर पर ओपीडी के चार केबिन स्थापित किए हैं, जिसमें आपात सेवाएं भी शामिल हैं। नया यूनिट शुरू होने से शहर के प्रमुख एसएमजीएस अस्पताल पर लोड कम हो जाएगा। अलग से यूनिट के स्थापित होने से एक ही जगह बच्चों को उचित उपचार मिल सकेगा।
एसएमजीएस अस्पताल में प्रमुख रूप से नियोनेटल बच्चों को उपचार दिया जा रहा है। रोजाना 70-80 प्रसव हो रहे हैं, जिसमें दर्जनों नवजात को नियोनेटल चिकित्सा की जरूरत होती है। 20 से 25 नियोनेटल बच्चे भर्ती हो रहे हैं। इसी तरह एमसीएच के चौथे फ्लोर पर 80 बिस्तरों पर नियोनेटल बच्चों को उपचार दिया जा रहा है। अधिकांश बच्चे एसएमजीएस से शिफ्ट होकर आते हैं। अब अलग से एमसीएच से नियोनेटल यूनिट होगी।
नियोनेटल यूनिट की प्रभारी डॉ. आशु जंबाल के अनुसार एमसीएच में ओपीडी शुरू करने के लिए ढांचा तैयार किया जा रहा है। साथ ही अलग नियोनेटल यूनिट शुरू होने से गांधीनगर से कुंजवानी और जिले के अन्य हिस्सों के लोगों को सीधा चिकित्सा लाभ मिलेगा। एमसीएच अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरुण कुमार के अनुसार ग्राउंड फ्लोर पर स्थापित चार केबिनों में नियोनेटल, बाल रोगियों, फालोअप और आपात मामलों को देखा जाएगा।
एक ही बिस्तर पर दो या तीन बच्चों को उपचार से मिलेगी निजात
छन्नी हिम्मत के राहुल कुमार ने कहा कि उन्हें बच्चों के इलाज के लिए एसएमजीएस जाना पड़ता था, लेकिन वहां लोड अधिक होने से एक ही बिस्तर पर दो या तीन बच्चों को उपचार दिया जाता है। अब एमसीएच में अलग से नियोनेटल यूनिट शुरू होने से बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी। बाबा तालाब के साहिल सिंह ने कहा कि एक माह से कम आयु वाले बच्चों को बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए अच्छा ढांचा होना जरूरी है और एमसीएच में यह संभव हो सकेगा। गंग्याल के विपिन संग्राल ने कहा कि अब उन्हें बच्चों को उपचार के लिए एमसीएच नजदीक पड़ेगा। विजय कुमार ने कहा कि एक ही छत के नीचे बच्चों के लिए चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।