जम्मू शहर से सटे ऐतिहासिक मांडा चिड़ियाघर (जू) को आम लोगों के लिए 15 अगस्त को बंद कर दिया जाएगा। मांडा जू से 12 प्रजातियों के जानवरों को खानपुर नगरोटा स्थित जंबू जू में शिफ्ट कर दिया गया है, जिससे अब मांडा जू का इस्तेमाल रेस्क्यू केंद्र के रूप में किया जाएगा। मांडा जू के बंद होने से शहरवासियों को अब 3 किमी. के बजाय 9.3 किलोमीटर का सफर तय करके जंबू जू तक जाना पड़ेगा।
इसमें टिकट के लिए उन्हें जेब भी ढीली करनी पड़ेगी।
मांडा जू में व्यस्क यात्री के लिए 20 रुपये शुल्क था, जबकि जंबू जू में उन्हें 80 रुपये देने होंगे। हालांकि जंबू जू में मांडा जू के जानवरों को शिफ्ट करने का प्रस्ताव पहले से था। इस चिड़ियाघर को 1980 के दशक में स्थापित किया गया था, जबकि जंबू जू को गत मई माह में शुरू किया गया है।
जम्मू शहर का मांडा चिड़ियाघर पूरे प्रांत का एकमात्र चिड़ियाघर है, यहां रोजाना सैकड़ों लोग परिवारों के साथ पहुंचते हैं। इसमें सामान्य दिनों में 200 से 300 और रविवार को 700-800 लोगों का जमावड़ा लगता है। इनमें अधिकांश लोग शहर से होते हैं। इसके साथ स्कूली बच्चों के लिए भी यह चिड़ियाघर भ्रमण का मुख्य केंद्र रहा है।
मांडा चिड़ियाघर छुट्टियों और सप्ताहांत पर परिवारों के साथ घूमने के लिए एक आदर्श स्थान रहा है और यह जम्मू और कश्मीर की विरासत हरि निवास पैलेस से बिल्कुल नजदीक है। टिकट की बात करें तो मांडा जू में बच्चों से 10 रुपये और वयस्कों से 20 रुपये एंट्री शुल्क लिया जा रहा था।
जंबू जू में 0 से 5 साल तक के बच्चों की निशुल्क एंट्री रखी गई है, लेकिन पांचवीं से 12वीं कक्षा तक के बच्चों के लिए समूह में प्रत्येक से 20 से 30 रुपये लिए जा रहे हैं। सरकारी स्कूल समूह में प्रत्येक बच्चे से 10 रुपये एंट्री रखी गई है। लेकिन भारतीय व्यस्क से 80 रुपये से लिए जा रहे हैं। दिव्यांग लोगों से 40 रुपये।
जंबू जू में ई रिक्शा की सुविधा उपलब्ध
जंबू जू में ई रिक्शा की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन इसके लिए शुल्क अदा करना होगा। मांडा जू से जंबू जू अधिक विशाल है। यहां पहले चरण में विभिन्न प्रजातियों के जानवरों को रखने के लिए 17 इंक्लोजर स्थापित किए गए हैं। इसमें सांबर, तेंदुआ, लेपर्ड, पीफोन, टर्की, चीतल, हाग डीयर, ब्लैक डीयर, चार प्रजातियों के सांप रखे गए हैं। आगामी सितंबर माह से दूसरे राज्यों से भी जानवरों को जंबू जू में लाया जा रहा है।
जंबू जू में जल्द दहाड़ेंगे जूनागढ़ के शेर
इसमें घड़ियाल को लखनऊ से, मगरमच्छ को हरियाणा, शेर को जूनागढ़ गुजरात, चीता को चेन्नई से लाया जाना है। जू में जानवरों को करीब से देखने के साथ व्यू प्वाइंट, एंपीथियेटर, सोविनियर, शॉप, पार्क, रिफ्रेशमेंट प्वाइंट आदि स्थापित किए गए हैं। जंबू जू के वार्डन अमित शर्मा का कहना है कि जंबू जू में पर्यटकों और यात्रियों का रुझान बढ़ा है।