अजय मीनिया जम्मू। जम्मू कश्मीर की उच्चतम न्यालय में फालतू के मामलों का अंबार लगा हुआ है। बहुत से निष्फल मामले हैं। यहां तक कि इन मामलों पर कानूनी कोई सवाल तक नहीं उठता। ऐसे में इन मामलों ने हाईकोर्ट सहित अन्य अदालतों में जाम लगा रखा है। जिससे न्यालय का काम भी अवरुध कर रखा है। दरअसल, लॉकडाउन में सिर्फ अति महत्वपूर्ण मामलों की ही सुनवाई हो रही है। इस दौरान खाली वक्त जब अदालतों में लंबित मामलों की समीक्षा शुरू हुई तो यह सामने आया कि कोर्ट में तो ऐसे मामलों का अंबार लगा है, जिनका कोई मतलब नहीं है। चीफ जस्टिस ने जम्मू और श्रीनगर विंग के दोनों कोर्ट को आदेश दिया है कि ऐसे मामलों का चयन करें और वीडियो कालिंग के जरिए इनको खत्म करें। चीफ जस्टिस ने कहा है कि वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए ऐसे मामलों को आसानी से निपटाए जाने की संभावना है। रजस्टिरी को निर्देश दिया गया है कि ऐसे मामलों की सूची तैयार कर इनके आनलाइन स्टेटस का पता लगाएं। किस तरह के मामले आए सामने जमानत अर्जियां अपील के निलंबन की मांग हेतु आवेदन चुनाव से संबंधित पुरानी याचिकाएं पुराने आयकर एवं आबकारी मामले ट्रांसफर और पोस्टिंग के मामले बीवी, बच्चों और मां को देने वाले खर्च घरेलू हिंसा सड़क हादसों में मुआवजा न मिलना एक विंग से दूसरी विंग में केस ट्रांसफर करना एक जिला अदालत से दूसरी जिला अदालत में कोर्ट ट्रांसफर करने की अर्जी घर में रहकर ही निपटाएंगे मदद लॉकडाउन में घर से निकलना मुश्किल है। लेकिन कौंसल द्वारा अपने स्तर पर मामलों के रिकार्ड की स्क्रूटनी करना संभव है। वह इन मामलों का पता लगा सकते हैं। कौंसल को अपने घर से निकलने के बगैर ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए ऐसे मामलों को निपटा सकते हैं। सभी कौंसल से अनुुरोध है कि वह ऐसे मामलों की स्क्रूटनी करें ओर संबंधित रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल को जानकारी दें। ताकि इनको निपटाया जा सके। गीता मित्तल, चीफ जस्टिस इनको दें जानकारी जम्मू संभाग के मामलों के लिए जम्मू विंग की हाईकोर्ट के लिए रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल सोनिया गुप्ता और कश्मीर विंग के लिए मसरत शाहीन रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल को कश्मीर संभाग के मामलों के लिए संपर्क करें। जब इनके पास जानकारी पहुंचेगी। फिर इन मामलों पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई होगी।