जम्मू सीट पर मुस्लिम मतों का प्रभाव कम
जम्मू सीट से राजोरी व पुंछ जिले को हटा दिया गया है। उधमपुर सीट से रियासी जिले को हटाकर जम्मू में जोड़ दिया है। ऐसे में जम्मू सीट पर मुस्लिम मतों का प्रभाव कम हुआ है। बारामुला व श्रीनगर सीट पर भी फेरबदल किया गया है। पहले बारामुला सीट में उत्तरी कश्मीर के तीन जिले बारामुला, बांदीपोरा व कुपवाड़ा आते थे, अब इसमें बडगाम के भी दो विधानसभा हलके जोड़ दिए गए हैं। श्रीनगर सीट पर इस बार दक्षिण कश्मीर के पुलवामा व शोपियां जिले के पांच विधानसभा हलकों को जोड़ा गया है। पहले मध्य कश्मीर के श्रीनगर, गांदरबल व बडगाम ही इस संसदीय क्षेत्र में शामिल थे।
राजोरी-अनंतनाग में यह बदली स्थिति
पहले लोकसभा की अनंतनाग सीट पर कश्मीरियों का ही वर्चस्व था। अब राजोरी-अनंतनाग संसदीय क्षेत्र में राजोरी-पुंछ के सात विधानसभा हलकों के लगभग साढ़े सात लाख वोटर शामिल किए गए हैं। इनमें हिंदुओं के अलावा पहाड़ी और गुज्जर-बकरवाल समुदाय के मतदाता बड़ी संख्या में हैं। पहाड़ी व गुज्जर-बकरवाल समुदाय को आरक्षण के बाद यहां सियासी समीकरण भी बदल गए हैं। इस सीट पर कश्मीर के 10.07 लाख वोटर हैं, जबकि जम्मू संभाग के 7.36 मतदाता।
नेकां ने पीडीपी से किया किनारा जम्मू में कांग्रेस से मिला रही हाथ
- 2019 : जम्मू-कश्मीर में भाजपा, पीडीपी, कांग्रेस व नेकां ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। नेकां को कश्मीर की तीन और भाजपा को जम्मू की दो सीटें मिलीं।
- 2024 : भाजपा अलग चुनाव लड़ रही है। नेकां और कांग्रेस के बीच जम्मू में सीट शेयरिंग की बात चल रही है। नेकां ने पीडीपी के लिए कोई भी सीट छोड़ने से इन्कार कर दिया है। पीडीपी फिलहाल अकेले है। पीपुल्स कांफ्रेंस भी मैदान में है। आजाद की पार्टी से गुलाम नबी आजाद ने खुद चुनाव न लड़ने की घोषणा कर दी है। अपनी पार्टी भी चुनाव में उतरेगी।