संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। ओबीसी संगठनों ने आरक्षण को लेकर शनिवार को निर्वाचन भवन के बाहर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन ऑल जम्मू-कश्मीर ओबीसी महासभा, ऑल इंडिया बैकवर्ड क्लास फेडरेशन और ऑल जेएंडके वेलफेयर फोरम के सदस्यों ने संयुक्त रूप से किया।
ऑल इंडिया बैकवर्ड क्लास फेडरेशन जम्मू-कश्मीर इकाई के महासचिव बलवंत कटारिया ने कहा कि सरकार से शहरी निकाय चुनावों में उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्यप्रदेश की तर्ज पर आरक्षण की मांग की है। इस दौरान शहरी स्थानीय निकायों और पंचायती राज प्रणाली में जम्मू-कश्मीर ओबीसी/ओएससी आरक्षण के संबंध में आपत्तियां भी दी।
एआईबीसीएफ के अध्यक्ष और ऑल जेएंडके प्रजापति सभा के महासचिव फकीर चंद सातिया ने कहा कि शहरी स्थानीय निकायों और पंचायती राज व्यवस्था में ओबीसी आरक्षण का मामला देश के अधिकांश राज्यों में लंबे समय से लागू किया जा चुका है। मगर जम्मू-कश्मीर में 1931 की जनगणना के अनुसार 32 प्रतिशत आबादी वाले जेके-यूटी ओबीसी को देश की आजादी के बाद से ही भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। अब अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बावजूद और जम्मू-कश्मीर अब एक केंद्र शासित प्रदेश है। इसलिए सभी केंद्रीय कानून सीधे जम्मू और कश्मीर पर लागू होते हैं। उन्होंने कहा कि सांविधानिक गारंटी होने और ओबीसी के पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बावजूद ओबीसी जनता को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है।
ऑल जेएंडके धोबी कल्याण केंद्रीय समिति के अध्यक्ष मोहम्मद शब्बीर संब्याल ने कहा कि जब तक हमारे सांविधानिक अधिकार जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं हो जाते, तब तक जेके-यूटी ओबीसी जनता कस्बों, तहसीलों और जिलों में विरोध प्रदर्शन और रैलियां आयोजित करेगी। प्रदर्शन में फकीर चंद सातिया, शशि वर्मा, बंसी लाल चौधरी, बंसी लाल गुंबल, रवि कुमार डोगरा, राज कुमार चालोत्रा बलवंत कटरिया, कुलदीप चलोत्रा, केवल फोत्रा, विकास भारद्वाज, विजय कुमार प्रजापति व अन्य मौजूद थे।