कठुआ जिले के हीरानगर ब्लॉक के गवर्नमेंट हाई स्कूल चड़वाल में आठ साल (2015-2023) तक शिक्षका रहीं ज्योति गुप्ता का स्कूल बदला, लेकिन स्कूल के छात्र मुर्तजा और उसके परिवार के प्रति उनकी जिम्मेवारी व अपनेपन का भाव नहीं बदला। चड़वाल स्कूल में पढ़ाते समय ज्योति ने नौवीं-दसवीं कक्षा में पढ़ाने की बजाय छोटी कक्षा के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। वह भी एक दोस्त की तरह। इससे न सिर्फ बच्चों का स्कूल के प्रति लगाव बढ़ा बल्कि शिक्षा के स्तर में भी सुधार हुआ।
इस दौरान ज्योति ने बच्चों को पढ़ाने साथ-साथ जरूरतमंद परिवार का सहारा बनने बीड़ा का भी उठाया। इसे उन्होंने स्कूल से तबादला होने के बाद भी जारी रखा है।
जम्मू शहर के डिग्याना की रहने वाली ज्योति गुप्ता की वर्ष 2015 में हाई स्कूल चड़वाल में तैनाती हुई। छात्र मुर्तजा स्कूल तो आता, लेकिन दस्तावेज में गड़बड़ी होने के चलते उसका दाखिला नहीं हो सका था। इस पर ज्योति ने उसके दाखिले के लिए प्रयास शुरू किया। इस बीच परिवार से भी मिलीं। जब उन्होंने देखा कि परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, तो खुद को मदद करने से नहीं रोक पाईं।
दरअसल मुर्तजा के पिता अक्सर स्कूल आते थे। फिर अचानक उनका स्कूल आना बंद हो गया। जब ज्योति ने उनके बारे में बच्चों से पूछा, तो पता चला की बिजली गिरने वह गंभीर रूप से बीमार हो गए हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ और आर्थिक तंगी के बारे में जानने के बाद ज्योति को परिवार को आर्थिक मदद करने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने बच्चों को पुस्तकें, कपड़े तो घर में राशन व अन्य जरूरी सामान देना शुरू किया। जुलाई 2023 में ज्योति का स्कूल से तबादला हो गया, लेकिन परिवार के प्रति अपनी जिम्मेवारी वह आज भी नहीं भूली हैं। उन्होंने परिवार की मदद करना जारी रखा है।
शिक्षिका ज्योति गुप्ता कहती हैं कि तकलीफ में मदद करते-करते परिवार से जुड़ाव हो गया है। यह सब इसलिए नहीं करती कि मुझे सुर्खियों में रहना है या फिर कोई महान कहे, बल्कि इसलिए क्योंकि यह सब करने के लिए मेरा दिल मुझे इजाजत देता है।
ऐसी दोस्ती बनी कि बच्चे नाम से पुकारने लगे
शिक्षिका ज्योति कहती हैं कि पहले स्कूल में कक्षा एक से पांचवीं तक शिक्षा का स्तर काफी खराब था। इसमें जब सुधार का जिम्मा उठाया, तो सबसे पहले बच्चों को पढ़ाने का तरीका बदला। बच्चों के साथ ऐसी दोस्ती हुई कि वह मुझे नाम से पुकारने लगे। वर्ष 2018 में एक हादसे के कारण जब मैं तीन महीने स्कूल नहीं गई, तो गुलाम नबी नामक एक बच्चे ने स्कूल में आना छोड़ दिया।