जम्मू। 1995 से लेकर अब तक 28 वर्षों में बिजली कारपोरेशन के 91 लाइनमैनों की मौत करंट लगने से हो चुकी है। औसतन हर साल तीन से चार मुलाजिम जान से हाथ धो रहे हैं। मगर अभी तक सुरक्षा उपकरण कर्मचारियों को मुहैया नहीं करवाए गए हैं। बारिश के मौसम में कर्मचारियों को बिना उपकरणों के ही लाइन की मरम्मत करनी पड़ती है। सुरक्षा उपकरण न होने के चलते मुलाजिम करंट की चपेट में आ रहे हैं। कारपोरेशन की तरफ से बीते साल सुरक्षा किट की खरीद के लिए प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन इसे अभी तक मंजूरी नहीं मिल पाई है।
आंकड़ों पर गौर करें तो 28 वर्षों में 180 के करीब कर्मचारी करंट लगने से झुलस चुके हैं। किसी ने अपना हाथ गवां दिया है तो किसी की आधी बाजू कट गई है। हर साल तीन से चार मौतें करंट लगने से हो रही हैं। मामलों में बढ़ोतरी होने पर उपकरण मुहैया करवाने का दावा किया जाता है मगर बाद में कुछ नहीं होता है। हाल ही में कटड़ा में एक लाइनमैन की करंट लगने से मौत हुई है। इससे पहले पनामा चौक और गांधी नगर में भी करंट लगने से मौतें हो चुकी हैं।
अगर बिजली कर्मियों को सुरक्षा उपकरण मिल जाते हैं तो उन्हें भारी राहत मिलेगी। बारिश में भी कर्मचारी सुरक्षित तरीके से बिजली की मरम्मत कर सकेंगे। इससे करंट लगने की संभावना न के बराबर हो जाती है। मौजूदा समय में कर्मचारी बिना उपकरणों के काम कर रहे हैं। इस कारण करंट की चपेट में आ रहे हैं।
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कोट
सुरक्षा किट पहनना अनिवार्य किया जाएगा। पहले किट मुहैया करवाई गई है। अगर कमी है तो नई किट खरीदी जाएगी।
- मनहर गुप्ता, मुख्य अभियंता, बिजली कारपोरेशन