अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। संस्कृति समाज की आवाज है, भारत सांस्कृतिक मूल्यों के पुनरुत्थान का गवाह बन रहा है। आधुनिक शिक्षा युवा पीढ़ी को प्राचीन मूल्यों को संरक्षित करते हुए वैश्विक दुनिया के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बना रही है। ये बातें उपराज्यपाल ने मनोज सिन्हा ने भारतीय संस्कृति और परंपरा के संरक्षण में आधुनिक शिक्षा की भूमिका विषय पर एक सेमिनार को संबोधित करते हुए की।
गाजीपुर में आयोजित सेमिनार में उपराज्यपाल ने संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान और प्रथाओं के संरक्षण। आधुनिक शिक्षा प्रणाली के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा ने परंपरा और प्रौद्योगिकी, विज्ञान और संस्कार के बीच एक अच्छा संतुलन बनाए रखा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी युवाओं के समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित कर यह सुनिश्चित करती है कि उन्हें शिक्षा के सर्वोत्तम वैश्विक मानकों तक पहुंच प्राप्त हो। शिक्षा क्षेत्र में सुधार और स्कूल और उच्च शिक्षा पर इसके प्रभाव पर भी बात की। शिक्षा में सुधार ने सांस्कृतिक पुनरुत्थान को नई गति दी है। आधुनिक शिक्षा प्रणाली के माध्यम से उज्ज्वल भविष्य की नींव रखी गई है। भारतीय संस्कृति, नैतिकता और नैतिक मूल्यों के प्रति एक नई रुचि पैदा हो रही है और एक नई चेतना आकार ले रही है।ब्यूरो