उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में अनावश्यक बयानबाजी से माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ कानून के दायरे में कार्रवाई करने पर सरकार विचार कर रही है। एलजी ने कहा कि सरकार आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, लेकिन अब समय है, जब बयानों से माहौल बिगाड़ने वालों पर कार्रवाई के लिए सोचना होगा। वैधानिक अधिकारों का उपयोग कर ऐसे लोगों पर कार्रवाई करनी होगी जो प्रदेश की शांति में बाधा उत्पन्न करने, आतंकवाद को बढ़ावा देने या फिर सामाजिक विद्वेष की भावना फैलाने से प्रेरित बयानबाजी करते हैं।
उप राज्यपाल ने कहा कि भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद यहां आने वाले लोगों को जमीन दी गई थी, लेकिन 1965 तथा उसके बाद आने वाले लोगों को भूमि संबंधी कठिनाई है, जिसका सरकार को ख्याल है। जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। कहा कि 370 हटने के बाद कई भूमि सुधार कानून लागू किए गए हैं। अब चार कनाल से कम भूमि वालों को भी हाई डेंसिटी प्लांट लगाने की अनुमति दे दी गई है। पहले बगीचा लगाने व पेड़ काटने के लिए राजस्व मंत्री की अनुमति जरूरी थी जिसे हटा दिया गया है। 370 व 35ए हटने से किसी की जमीन व नौकरी पर कोई असर नहीं पड़ा है। यह लोगों को पूरा भरोसा रखना चाहिए कि उनकी जमीन तथा नौकरी पर उनका ही हक है।
एलजी ने कहा कि सरकार ने जिला स्तर पर सुशासन सूचकांक जारी करना शुरू किया है। इससे प्रत्येक जिला अपने यहां 58 बिंदुओं पर बेहतर काम करने की कोशिश कर रहा है। पुलवामा जैसा जिला जो पहले किसी और नाम के लिए जाना जाता रहा है वह इस सूचकांक में पहले स्थान पर है। हमारी कोशिश है कि इसे ब्लाक स्तर तक ले जाया जाए।
उपराज्यपाल ने कहा कि पीएम पैकेज के तहत नियुक्त कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को इसी महीने डेढ़ हजार घर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके तहत छह हजार पंडित कर्मचारी और तीन हजार जम्मू संभाग के कर्मचारी घाटी में कार्यरत हैं। कश्मीरी पंडित कर्मचारी राहुल भट तथा रिजर्व्ड कैटेगरी की शिक्षिका रजनी बाला की हत्या से आक्रोश है। उनकी समस्याओं पर विचार किया जा रहा है। उन्हें हाल ही में प्रोन्नति का लाभ दिया गया है। एलजी कार्यालय में गठित सेल लगातार इनकी समस्याओं पर काम कर रहा है। इनकी समस्याओं पर पूरी नजर है। उनके हितों की रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि जम्मू की हमेशा शिकायत रही है कि यहां बजट और विकास कम हुआ है, लेकिन जम्मू और कश्मीर दोनों हमारी आंखें हैं। किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। लेकिन यह सही है कि दुर्गम इलाकों में अब भी कनेक्टिविटी की समस्या है। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क बनने में थोड़ी देरी लगती है। एक लाख करोड़ के रोड और टनल के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। उम्मीद है कि अगले दो साल में यहां बेहतर कनेक्टिविटी हो जाएगी। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। कई अछूते इलाकों में पर्यटक भारी तादाद में पहुंचेंगे जिससे रोजगार सृजित होगा।
शोपियां में कश्मीरी पंडित की हत्या के बाद एक सवाल के जवाब में नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा था - जब तक लोगों को उनका हक नहीं मिल जाता, टारगेट किलिंग बंद नहीं होने वाली। इसका कश्मीरी पंडितों समेत कई वर्गों ने कड़ा विरोध किया था। एलजी ने भी फारूक अब्दुल्ला के सत्ता में रहने के दौरान के हालात का जिक्र कर टारगेट किलिंग पर बयान को आड़े हाथों लिया था।