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जम्मू कश्मीर: बयानों से माहौल बिगाड़ने वालों पर कार्रवाई का समय, एलजी बोले- कुछ लोगों की जागीर खतरे में पड़ी

Thu, 20 Oct 2022 02:18 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि आतंकवाद और इस प्रकार की गतिविधियों को जो कोई भी बढ़ावा देने की कोशिश करेगा उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होगी।एक न्यूज चैनल से बात करते हुए उन्होंने कहा कि दरअसल 370 हटने के बाद कुछ लोगों की जागीर खतरे में पड़ गई है। इसलिए वे अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं और इसे हवा दे रहे हैं।
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उपराज्यपाल मनोज सिन्हा - फोटो : ani
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विस्तार
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उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में अनावश्यक बयानबाजी से माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ कानून के दायरे में कार्रवाई करने पर सरकार विचार कर रही है। एलजी ने कहा कि सरकार आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, लेकिन अब समय है, जब बयानों से माहौल बिगाड़ने वालों पर कार्रवाई के लिए सोचना होगा। वैधानिक अधिकारों का उपयोग कर ऐसे लोगों पर कार्रवाई करनी होगी जो प्रदेश की शांति में बाधा उत्पन्न करने, आतंकवाद को बढ़ावा देने या फिर सामाजिक विद्वेष की भावना फैलाने से प्रेरित बयानबाजी करते हैं।

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आतंकवाद और इस प्रकार की गतिविधियों को जो कोई भी बढ़ावा देने की कोशिश करेगा उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होगी।एक न्यूज चैनल से बात करते हुए उन्होंने कहा कि दरअसल 370 हटने के बाद कुछ लोगों की जागीर खतरे में पड़ गई है। इसलिए वे अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं और इसे हवा दे रहे हैं। इसकी किसी को भी अनुमति नहीं दी जाएगी।

आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले सरकारी तंत्रों में भी घुस गए हैं। ऐसे तत्वों का सफाया किया जा रहा है। ऐसे 42 लोगों को बर्खास्त किया जा चुका है। सामान्य रूप से यहां का आम नागरिक खासकर युवा इससे बाहर निकल चुका है। अब वह स्टार्टअप और इनोवेशन की ओर बढ़ रहा है। पिछले साल साढ़े सत्रह लाख युवाओं ने खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सेदारी की थी।
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इस साल 35 लाख तक युवाओं की भागीदारी के प्रयास किए जा रहे हैं। स्कूलों ओर शिक्षा तंत्र में भी ऐसे लोग घुस चुके थे, जो बुनियादी तौर पर माइंडसेट में बदलाव की साजिश में थे। इस पर भी नजर है और काफी हद तक स्कूली व उच्च शिक्षा में पाठ्यक्रम को वैज्ञानिक बनाया गया है। इस पर आगे भी काम चलता रहेगा।

उन्होंने कहा कि हाल में हुई टारगेट किलिंग में कश्मीरी पंडित और उत्तर प्रदेश के दो मजदूरों के मारे जाने की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुई हैं। किसी की जान का कोई मुआवजा नहीं होता। आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता है। मुसलमान भी मारे गए हैं, लेकिन पहले की तुलना में आतंकी घटनाएं लगभग आधी रह गई हैं।

सुरक्षा परिदृश्य में सुधार हुआ है, लेकिन अपेक्षाएं बढ़ी हैं। लोगों की अपेक्षा है कि मोदी राज में एक भी हत्याएं न हो। पहले 36 हत्याएं एक दिन में होती थीं औऱ चर्चा तक नहीं होती थी। आज वह लोग भी सवाल उठा रहे हैं। अब पाकिस्तान के इशारे पर आए दिन होने वाली हड़ताल का सिलसिला थमा है।

पत्थरबाजी व आगजनी कहानी हो गई है। इस साल दस महीने में 162 आतंकी मारे गए जिनमें 46 विदेशी थे। कुछ ताकतें खासकर पड़ोसी को अमन चैन और विकास रास नहीं आ रहा। भारत सरकार के पैसे से आतंकवाद चल रहा था जो अब बंद हो गया है।

उन्होंने कहा कि 370 हटने के बाद तस्वीर काफी बदली है। कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार हुआ है। विकास के काम तेज गति से हो रहे हैं। पुलवामा व शोपियां में सिनेमा हाल खुल गए हैं। श्रीनगर में मल्टी प्लेक्स चल रहा है। तीन दशक से यह सब कुछ बंद था।

पड़ोसी मुल्क और उसके इशारे पर काम करने वालों को यह रास नहीं आ रहा है। पाकिस्तान की ग्रे लिस्ट से बाहर आ जाने का भी जम्मू-कश्मीर पर कोई असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि पीओजेके में लोगों के पास खाने के लिए नहीं है। बिजली नहीं है। दवाओं का अभाव है। एंबुलेंस नहीं है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। दुनिया भर की देशों की नजर है कि कौन सा देश आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। विदेश मंत्रालय की भी पूरी स्थिति पर नजर है।

1965 के बाद आए लोगों के भूमि मामलों का समाधान करेगी सरकार

उप राज्यपाल ने कहा कि भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद यहां आने वाले लोगों को जमीन दी गई थी, लेकिन 1965 तथा उसके बाद आने वाले लोगों को भूमि संबंधी कठिनाई है, जिसका सरकार को ख्याल है। जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। कहा कि 370 हटने के बाद कई भूमि सुधार कानून लागू किए गए हैं। अब चार कनाल से कम भूमि वालों को भी हाई डेंसिटी प्लांट लगाने की अनुमति दे दी गई है। पहले बगीचा लगाने व पेड़ काटने के लिए राजस्व मंत्री की अनुमति जरूरी थी जिसे हटा दिया गया है। 370 व 35ए हटने से किसी की जमीन व नौकरी पर कोई असर नहीं पड़ा है। यह लोगों को पूरा भरोसा रखना चाहिए कि उनकी जमीन तथा नौकरी पर उनका ही हक है। 

सुशासन सूचकांक ब्लाक स्तर पर ले जाया जाएगा

एलजी ने कहा कि सरकार ने जिला स्तर पर सुशासन सूचकांक जारी करना शुरू किया है। इससे प्रत्येक जिला अपने यहां 58 बिंदुओं पर बेहतर काम करने की कोशिश कर रहा है। पुलवामा जैसा जिला जो पहले किसी और नाम के लिए जाना जाता रहा है वह इस सूचकांक में पहले स्थान पर है। हमारी कोशिश है कि इसे ब्लाक स्तर तक ले जाया जाए। 

पीएम पैकेज कर्मियों को इसी महीने डेढ़ हजार आवास

उपराज्यपाल ने कहा कि पीएम पैकेज के तहत नियुक्त कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को इसी महीने डेढ़ हजार घर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके तहत छह हजार पंडित कर्मचारी और तीन हजार जम्मू संभाग के कर्मचारी घाटी में कार्यरत हैं। कश्मीरी पंडित कर्मचारी राहुल भट तथा रिजर्व्ड कैटेगरी की शिक्षिका रजनी बाला की हत्या से आक्रोश है। उनकी समस्याओं पर विचार किया जा रहा है। उन्हें हाल ही में प्रोन्नति का लाभ दिया गया है। एलजी कार्यालय में गठित सेल लगातार इनकी समस्याओं पर काम कर रहा है। इनकी समस्याओं पर पूरी नजर है। उनके हितों की रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। 

जम्मू में अगले दो साल में बढ़ेगी कनेक्टिविटी

उन्होंने कहा कि जम्मू की हमेशा शिकायत रही है कि यहां बजट और विकास कम हुआ है, लेकिन जम्मू और कश्मीर दोनों हमारी आंखें हैं। किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। लेकिन यह सही है कि दुर्गम इलाकों में अब भी कनेक्टिविटी की समस्या है। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क बनने में थोड़ी देरी लगती है। एक लाख करोड़ के रोड और टनल के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। उम्मीद है कि अगले दो साल में यहां बेहतर कनेक्टिविटी हो जाएगी। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। कई अछूते इलाकों में पर्यटक भारी तादाद में पहुंचेंगे जिससे रोजगार सृजित होगा। 

टारगेट किलिंग पर फारूक के बिगड़े थे बोल

शोपियां में कश्मीरी पंडित की हत्या के बाद एक सवाल के जवाब में नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा था - जब तक लोगों को उनका हक नहीं मिल जाता, टारगेट किलिंग बंद नहीं होने वाली। इसका कश्मीरी पंडितों समेत कई वर्गों ने कड़ा विरोध किया था। एलजी ने भी फारूक अब्दुल्ला के सत्ता में रहने के दौरान के हालात का जिक्र कर टारगेट किलिंग पर बयान को आड़े हाथों लिया था।

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