जम्मू। जम्मू-कश्मीर में वन्यजीव पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। शुक्रवार को जम्मू सचिवालय में उप राज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में हुई जम्मू-कश्मीर वन्यजीव बोर्ड की 5वीं बैठक में जंबू जू के विस्तार, गुलमर्ग के अभ्यारण्य में कंडोरी स्की लिफ्ट के निर्माण के साथ अन्य परियोजनाओं पर मंथन किया गया। इस दौरान वन्यजीव पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती के लिए कई एजेंडा बिंदुओं को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई।
उप राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में मूल्यवान वन्यजीव संसाधनों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ाने पर काम किया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर नगरोटा स्थित जंबू जू जैसी मेगा परियोजनाओं की दृश्यता बढ़ाने के लिए प्रचार गतिविधियों की एक शृंखला आयोजित की जाए।
समृद्ध जैव विविधता के सतत प्रबंधन और वन्यजीव आवासों के एकीकृत विकास के लिए प्रमुख हस्तक्षेपों पर चर्चा की। उन्होंने राजबाग श्रीनगर में वन्यजीव कार्यालय परिसर के उद्घाटन के साथ-साथ जंबू जू पर एक कॉफी टेबल बुक और एक लघु फिल्म जारी की। एलजी ने जसरोटा वन्यजीव अभ्यारण्य, जम्मू-कश्मीर में जंगली जीवों (स्तनधारी, पक्षी व तितलियों) और वनस्पतियों के सरंक्षण के लिए अधिकारियों को निर्देश जारी किए। इस मौके पर मुख्य सचिव अटल डुल्लू, प्रधान सचिव डॉ मनदीप कुमार भंडारी के अलावा अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
कश्मीर के वेटलैंड संरक्षण रिजर्व पर पुस्तक का किया विमोचन
जम्मू-कश्मीर वन्यजीव बोर्ड की बैठक में जसरोटा वन्यजीव अभ्यारण्य (कठुआ) में वन्यजीवों और वनस्पतियों की जैव विविधता मूल्यांकन पर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इसके साथ ही कश्मीर के वेटलैंड संरक्षण रिजर्व पर एक पुस्तिका जिसका शीर्षक कंजर्वेशन ट्राइंफ- 2024 भी उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने जारी किया। उन्होंने जंबू जू के विस्तार के प्रस्ताव की समीक्षा के साथ पिछली बोर्ड बैठक में पारित निर्देशों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी।
जलापूर्ति व सड़क परियोजनाओं के लिए वाहनों की खरीद पर मंथन
बैठक में प्रस्तुत एजेंडा बिंदुओं में गुलमर्ग वन्यजीव अभ्यारण्य में कंडोरी स्की लिफ्ट, बाहु संरक्षण रिजर्व जम्मू में श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की ओर से यात्री निवास और आपदा प्रबंधन केंद्र का निर्माण, चहत जोरावर ऑपरेशनल ट्रैक के लिए वाहनाें की खरीद पर विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही मानव-पशु संघर्ष प्रबंधन, विभिन्न जल आपूर्ति योजनाओं और सड़क परियोजनाओं के विस्तार पर भी चर्चा की गई।