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Jammu News: एलईडी लाइटें लगाने पर 60 करोड़ खर्च, डेढ़ साल में ही 90 हजार में से 35 हजार खराब

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अमर उजाला ब्यूरो
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जम्मू। शहर में एलईडी लाइटें लगाने के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। संबंधित कंपनी की ओर से सभी 75 वार्डों में एलईडी लाइटें लगाने के नाम पर 60 करोड़ खर्च कर दिए, मगर हालात ऐसे हैं कि शाम ढलते ही गलियों में अंधेरा पसर जाता है। वजह- 90 हजार में से 35 हजार डेढ़ साल में ही खराब हो गईं। इसका खुलासा पार्षदों ने किया। लाइटें बंद होने की 35 हजार ही शिकायतें अब तक पहुंच चुकी हैं। इसके बावजूद संबंधित कंपनी द्वारा लाइटें ठीक नहीं करवाई जा रहीं। चर्चा है कि विभागीय मिलीभगत से कंपनी ने लाइटों के नाम पर कम से कम 20 करोड़ का घपला किया है।

निगम के अनुसार 2019 में करार के बाद 2021 में लाइटें लगाने पर काम शुरू हुआ, जो अंतिम चरण में है। 90 हजार एलईडी लाइटें लग चुकी हैं। छह हजार और लगाई जानी हैं। काम को नवंबर तक पूरा करने के निर्देश हैं, लेकिन इससे पहले ही करीब डेढ़ साल में 35 हजार लाइटें खराब हो गईं। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एक लाइट लगवाने पर सात हजार रुपये खर्च आ जाता है। ऐसे में 90 हजार लाइटों पर 60 करोड़ से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। इनमें 35 हजार लाइटें डेढ़ साल में ही खराब हो गईं। पार्षदों द्वारा बार-बार कहने के बाद भी लाइटें ठीक नहीं कराई जा रहीं। कम से कम 20 करोड़ के घपले की बात सामने आ रही है।
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इन वार्डों में छाया अंधेरा
करार के मुताबिक लाइटें फ्यूज या फिर खराब होने पर तीन माह के अंदर नई लगाई जानी हैं, मगर नियम को अनदेखा किया जा रहा है। निगम भी कंपनी पर कार्रवाई करने से बच रहा है। कई वार्डों में तीन माह तो कई वार्डों में आठ माह में ही लाइटें खराब हो गईं। हालात ऐसे हैं कि रात को राहगीरों को हादसों का शिकार होना पड़ रहा है। यही नहीं, अंधेरा के बीच लावारिस कुत्ते भी हमला कर देते हैं। मौजूदा समय में वार्ड-एक से 15, 28, 62, 46, 47, 48, 19, 72, 73, 74, 75 और 55 में अंधेरा पसरा है।



मोबाइल की टॉर्च का सहारा
नेता विपक्ष द्वारका चौधरी, वार्ड-28 के पार्षद गौरव चोपड़ा, वार्ड-छह की पार्षद रितु चौधरी, वार्ड-19 के पार्षद अमित गुप्ता, वार्ड-71 की पार्षद शमा अख्तर, सुच्चा सिंह, प्रो. युद्धवीर सिंह सहित अन्य पार्षदों का कहना है कि लाइटें लगाने के बाद से फ्यूज हैं। नगर निगम ठीक नहीं करवा रहा। हालांकि काम कंपनी ने करवाया है मगर जिम्मेदारी नगर निगम की है। अब करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी गलियों में अंधेरा है। मोबाइल की टॉर्च के सहारे बाहर निकलना पड़ रहा है।
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2022 के बाद ही खराब हो गई थी लाइटें
बख्शी नगर के सन्नी वर्मा ने बताया कि लाइटें खराब होने से गलियों में अंधेरा रहता है। इस कारण रात को परेशानी पेश आ रही है। जसवंत सिंह के अनुसार 2021 में लाइटें लगाई गई। 2022 के बाद ये फ्यूज होनी शुरू हो गईं। लाइटें ठीक करने कोई नहीं आ रहा। कई बार समस्या से अवगत करवाया जा चुका है। योगेश थप्पर ने बताया कि मोहल्लों में कुछ लाइटें एक साल से खराब हैं। कंपनी द्वारा तीन माह के अंदर बदली जानी थी। नगर निगम कार्रवाई नहीं कर रहा। इसी तरह शम्मी सिंह ने दिक्कत बताई कि रात को गलियों से गुजरने पर कुत्ते काट रहे हैं। इससे लोगों में खौफ है।

नगर निगम के पास लाइटें फ्यूज होने की शिकायतें पहुंच रही हैं। कंपनी को अवगत करवाया गया है। समय पर काम नहीं होने पर अब कार्रवाई की जाएगी।
- अरुण गुप्ता, एक्सईएन, नगर निगम
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