संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। लक्ष्मी नारायण मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन रासलीला, रुक्मिणी हरण और विवाह, सुदामा-कान्हा की मित्रता के प्रसंग सुनाए गए। कान्हा और रुक्मिणी के विवाह की कथा सुनकर भक्त प्रसन्न हो गए और कान्हा के नाम का सिमरन करने लगे।
कथा वाचक पंडित मनोज शुक्ला ने बताया कि मित्रता में भेदभाव नहीं किया जाता और न ही ऊंच नीच करना सिखाती है। एक बार गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने की इच्छा प्रकट की। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों की कामना पूरी करने का वचन दिया। उन्होंने रास का आयोजन किया। सभी गोपियां सज-धज कर यमुना तट पर पहुंचीं। इसके बाद रास आरंभ हुआ। कहा जाता है कि वृंदावन में निधिवन वह स्थान है, जहां महारास हुआ था।
मंगल भजन के बीच कहा, रुक्मिणी की इच्छा के बिना शिशुपाल से शादी करने के लिए उनके भाई रुक्मी मजबूर कर रहे थे। उस समय एक राजकुमारी के लिए स्वयंवर आयोजित किया जाता था ताकि वे अपना जीवनसंगी खुद चुन सकें। माता रुक्मिणी कृष्ण से शादी करना चाहती थी क्योंकि वह प्रेम करती थी इसलिए कान्हा ने उनका पत्र मिलने के बाद हरण की योजना बनाई और फिर विवाह कर लिया।
आगे कहा, दुनिया में किसी की दोस्ती की दात दी जाती है तो कान्हा और सुदामा की, क्योंकि उनकी दोस्ती में भेदभाव नहीं था। अब शनिवार सुबह हवन और दोपहर को भंडारा होगा।