उधमपुर में एक के बाद एक हुए दो धमाकों में शक की सुई आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा पर है। जांच में जुटी सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि सीमा पार पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू - कश्मीर (पीओजेके) में बैठकर आतंकी गतिविधियां चलाने वाले लश्कर के हैंडलर डोडा निवासी मोहम्मद आमिन उर्फ खुबैब की यह करतूत है।
उधमपुर में सलाथिया चौक पर नौ मार्च को कोर्ट के बाहर हुए धमाके में भी इसका नाम आया था। स्टिकी बम से किए गए हमले में एक नागरिक की मौत हो गई थी जबकि 16 घायल हुए थे। सूत्रों के अनुसार डोडा निवासी खुबैब का पिता मोहम्मद इशहाक लश्कर का प्रशिक्षित आतंकी था जिसे 2003 में सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में मार गिराया था।
खुबैब भी हथियारों की ट्रेनिंग लेने पीओजेके चला गया और फिर वहीं से आतंकी गतिविधियां चलाने लगा। खुबैब को चिनाब घाटी में फिर से आतंकवाद को जिंदा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके तहत वह डोडा, किश्तवाड़, रामबन, भद्रवाह और आसपास के इलाकों में युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर आतंकवाद के रास्ते पर झोंकने में लगा हुआ था।
इसके साथ ही उसने आत्मसमर्पण कर चुके आतंकियों को दोबारा सक्रिय करने की साजिश की। युवाओं को सोशल मीडिया के जरिये वह बरगलाता है। सूत्रों ने बताया कि नौ मार्च को स्टिकी बम हमले में तीन आरोपियों को पकड़ा गया था।
जिन्होंने पूछताछ में यह स्वीकार किया था कि खुबैब के इशारे पर उन्होंने स्टिकी बम रखा था। इसी को आधार बनाकर जांच की जा रही है। जांच से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फिलहाल सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है।
कई मॉड्यूल होने की आशंका
उधमपुर के सलाथिया चौक पर नौ मार्च को हुए धमाके में तीन आतंकियों को गिरफ्तार किया गया था। तीनों ने मॉड्यूल की तरह वारदात को अंजाम दिया। अब दो बसों में धमाके से खुबैब के तार जुड़ने पर यह आशंका भी पुख्ता हो रही है कि उधमपुर व सटे जिलों में कई और मॉड्यूल सक्रिय हैं। सुरक्षा एजेंसियां इन तमाम आशंकाओं को ध्यान में रखकर छानबीन में जुटी हैं।
डूडू-बसंतगढ़ कनेक्शन की तलाश
धमाके को लेकर रामनगर तथा डूडू-बसंतगढ़ कनेक्शन की भी तलाश की जा रही है। रामनगर को शांत इलाका माना जाता है, लेकिन डूडू-बसंतगढ़ में आतंकी सक्रिय रहे थे। उधमपुर में जिन दो बसों में धमाका हुआ वे दोनों रामनगर तथा सुदूरवर्ती डूडू-बसंतगढ़ से आयी थीं।
डूडू-बसंतगढ़ में 1993 से 1995 के बीच आतंकी सक्रिय थे। दिसंबर 1993 में बसंतगढ़ थाने पर आतंकियों ने हमला भी किया था। उस समय उधमपुर के एसएसपी रहे पूर्व डीजीपी डॉ. एसपी वैद का कहना है कि रामनगर और डूडू-बसंतगढ़ की बसों में धमाका शक पैदा करता है। इसलिए इसकी विस्तृत जांच की जानी चाहिए कि क्या दोनों जगह से विस्फोट का कोई कनेक्शन तो नहीं है। इस कनेक्शन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।