मरीजों को निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों में छह हजार तक खर्च कर कराने पड़ रहे टेस्ट
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। अनंतनाग जिले के राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) सुविधा उपलब्ध न होने से मरीजों को परेशानी हो रही है। कुछ मरीजों ने कहा कि उन्हें निजी डायग्नोस्टिक केंद्रों पर जाना पड़ता है। अस्पताल में पहुंचे मरीज मोहम्मद अब्बास ने कहा कि डॉक्टरों ने उन्हें एमआरआई कराने की सलाह दी, लेकिन जीएमसी में सुविधा के अभाव में निजी डायग्नोस्टिक केंद्र में जाना पड़ा। निजी सेंटर में एमआरआई कराने में 5000-6000 रुपये खर्च आता है, लेकिन दर्जनों मरीज ऐसे हैं जो यह खर्च नहीं उठा सकते।
सबसे ज्यादा परेशानी गरीब मरीजों को हो रही है, क्योंकि वे स्कैन का खर्च उठाने में असमर्थ हैं, इसलिए उनके इलाज में देरी हो रही है। लोगों ने संबंधित अधिकारियों से इस सुविधा को स्थापित करने की मांग की है। एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इलाज से पहले मरीजों को स्कैन करने की आवश्यकता को देखते हुए उन्हें जीएमसी में एमआरआई सुविधा की तत्काल आवश्यकता है। एमआरआई एक डायग्नोस्टिक पावर हाउस है, जो मानव शरीर की आंतरिक कार्यप्रणाली को अद्वितीय सटीकता के साथ उजागर करता है। यह असाधारण तकनीक आंतरिक संरचनाओं के जटिल दृश्य तैयार करने के लिए चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों की शक्ति का उपयोग करती है।
उन्होंने कहा, अस्पताल प्रशासन ने पहले ही ए-ब्लॉक में एमआरआई स्कैनर की स्थापना के लिए एक समर्पित स्थान निर्धारित कर लिया है और उम्मीद है कि यह सुविधा जल्द मिलेगी। एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि सरकार ने अभी तक जीएमसी अनंतनाग के लिए एमआरआई सुविधा को मंजूरी नहीं दी है। लेकिन जल्द सुविधा लब्ध कराने के प्रयास जारी है।