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पठानकोट: कठुआ सामूहिक दुष्कर्म-हत्या मामले का आरोपी पांचवीं बार कोर्ट में पेश, अगली सुनवाई 11 जुलाई को

Thu, 06 Jul 2023 12:34 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

आरोपी शुभम सांगरा को बुधवार पांचवीं बार पठानकोट की जिला एवं सेशन अदालत लाया गया। पेशी के बाद कोर्ट ने इस केस की अगली सुनवाई 11 जुलाई तय की है। 
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कठुआ कांड - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बहुचर्चित कठुआ सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड के आठवें आरोपी शुभम सांगरा को बुधवार पांचवीं बार पठानकोट की जिला एवं सेशन अदालत लाया गया। पेशी के बाद कोर्ट ने इस केस की अगली सुनवाई 11 जुलाई तय की है। 

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अभियोग पक्ष के वकील हितेष चोपड़ा ने बताया कि 11 जुलाई को मामले की अगली सुनवाई होगी। जम्मू-कश्मीर में कठुआ जिले के रसाना गांव में 10 जनवरी, 2018 को 8 साल की बच्ची अगवा हुई थी। 12 जनवरी को हीरानगर पुलिस ने मामला दर्ज किया। 17 जनवरी को उसका शव मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि हुई। 22 जनवरी, 2018 को यह केस क्राइम ब्रांच को सौंपा गया था। 

जांच के बाद 7 आरोपी, जिसमें सांझी राम (तत्कालीन ग्राम पंचायत प्रधान), उसके बेटे विशाल, विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया उर्फ दीपू, सुरेंद्र कुमार, परवेश कुमार उर्फ मन्नू, हेड कांस्टेबल तिलक राज और उपनिरीक्षक आनंद दत्ता को गिरफ्तार किया था। इसके बाद आठवां आरोपी व सांझी राम के भतीजे शुभम सांगरा को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उसके केस को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में ट्रांसफर कर दिया गया था। 
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16 अप्रैल को कठुआ की सेशन कोर्ट में ट्रायल शुरू हुआ, लेकिन 7 मई 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को कठुआ से करीब 30 किमी दूर पंजाब के पठानकोट की जिला एवं सत्र अदालत में ट्रांसफर कर दिया, क्योंकि, जम्मू-कश्मीर सरकार और कुछ वकीलों ने कठुआ में निष्पक्ष सुनवाई नहीं होने की आशंका व्यक्त की थी। 

जून, 2018 के पहले हफ्ते में सुनवाई शुरू हुई थी। इसी माह में 7 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर की रणबीर दंड संहिता के तहत आरोपियों पर धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 302 (हत्या) और 376डी (सामूहिक दुष्कर्म) के तहत आरोप तय किए। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद किशोर आरोपी शुभम सांगरा को छोड़कर सभी आरोपियों को गुरदासपुर जेल में भेज दिया गया था। 

3 आरोपियों को उम्रकैद, 3 को 5 साल की सजा मिली। 3 जून, 2019 को मामले का ट्रायल पूरा हो गया। सेशन कोर्ट में लगातार 245 दिन तक सुनवाई चली। पीड़ित पक्ष की ओर से 114 गवाहों को पेश किया गया, जबकि बचाव पक्ष की ओर से 18 गवाह मात्र 20 दिन में पेश गए।

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