संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। नानक नगर की महिला के लिए युद्धबंदी का ग्रहण ऐसा लगा कि 52 साल बाद भी चांद निकल नहीं पाया। उन्हें हर करवा चौथ पर उम्मीद होती है कि आज पति का दीदार हो जाएगा। इसी आस में हर साल व्रत रखती हैं, पर शारीरिक समस्या के कारण वे व्रत नहीं रखेंगे। हालांकि 85 साल की निर्मल कौर आंखों में पति की तस्वीर लेकर बुधवार रात को चांद देखने के लिए छत पर जरूर चढ़ेंगी। शायद उन्हें यकीन है कि चांद की तरह पति सामने दिख जाएं। उनकी आंखें पत्थरा जरूर गई हैं, लेकिन पति की सकुशल वापसी की उम्मीद नहीं छोड़ी। पति की लंबी उम्र के लिए वह भगवान शिव और मां संतोषी का व्रत भी रखती हैं।
85 साल की निर्मल कौर कहती हैं -हर सुहागिन की इच्छा रहती हैं कि उसे करवा चौथ पर पति के दर्शन जरूर हो। उनकी इच्छा पर भले ही ग्रहण लगा है लेकिन उम्मीद की किरण सांस थमने तक जारी रहेगी। भरे मन से कहा कि इस साल व्रत नहीं रख पा रही क्योंकि रसोली हो गई है और डॉक्टर ने ऑपरेशन करने से मना कर दिया है, फिर भी सुबह उठा कर सुहागिन का फर्ज निभाउंगी।
निर्मल कौर के पति कप्तान अस्सा सिंह (उस समय सूबेदार) पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। 1971 के युद्ध के दौरान छंब से उन्हें बंदी बना लिया था। वह कहती हैं कि पति की सकुशल वापसी के लिए सरकार की तरफ से पाकिस्तान भी गई, लेकिन वहां की सरकार ने अस्सा सिंह को रिहा नहीं किया और न ही उनके बारे में कुछ भी बताया। विश्वास है कि पति जिंदा हैं।
बतौर निर्मल 32 साल की थी जब पाकिस्तान के कारण पति से अलग हो गईं। तब सात छोटे बच्चे थे जिनमें पांच बेटियां और दो बेटे थे। सभी की उनकी याद में अच्छी परवरिश के साथ शादियां की। इसी बीच सेना ने पति को कप्तान बना दिया और पेंशन से बच्चों को पढ़ाया। मुझे लगता है कि ईश्वर मेरी भक्ति का फल दे रहे हैं और देंगे भी। सुहाग को सलामत रखेंगे।