अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। समाज कल्याण विभाग की ओर से जम्मू विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय दत्तक ग्रहण माह के उपलक्ष्य में नटरंग ने नीरज कांत के निर्देशन में हिंदी नाटक सहारा के दो शो मंचित किए। नाटक की शुरुआत अभिनेताओं द्वारा युद्ध, महामारी, प्राकृतिक आपदाओं और अन्य दुर्घटनाओं में मारे गए माता-पिता के अनाथ बच्चों से होती है। एक लड़की माता-पिता की असामयिक मौत के बाद भाई-बहनों के आतंकवाद का शिकार होकर अनाथ होने की दर्दनाक कहानी सुनाती है। अगले दृश्य में अन्य युवा लड़की गंगा अनाथ होने की भयावह दर्दनाक कहानी सुनाते कहती है कि बचपन में जैसे ही होश आया तो खुद कोअनाथालय में पाया। विडंबना यह है कि माता-पिता के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। वह हमेशा माता-पिता के प्यार की चाहत रखती थी, लेकिन सरकार की नई पहल से बेहद खुश हैं, क्योंकि माता-पिता के साथ-साथ जीवनसाथी भी मिल गया है। वह कहती है कि अब अनाथ नहीं है और उसका अपना परिवार है। यह केवल नए माता-पिता के कारण संभव हुआ है जिन्होंने गोद लिया।
गंगा का पति शुरू से ही एक बेसहारा लड़की को जीवन संगिनी बनाना चाहता था। हालांकि उन्हें अपने परिजनों को गंगा के साथ शादी के बारे में कहने में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, मगर वे सहमत हो गए और उन्होंने गंगा से शादी कर ली। शादी के पांच साल बाद भी कोई बच्चा नहीं हुआ। अनाथालय में पली-बड़ी गंगा एक बच्चे को गोद लेने के नियम-कायदे जानने के लिए जिला बाल संरक्षण इकाई पहुंचती है। यहां अधिकारी जानकारी प्रदान करते हैं।
अन्य दृश्य में वयस्क जोड़ा, जो 6 से 18 वर्ष की आयु के बीच के बच्चे को गोद लेना चाहता है, वह नियमों के बारे में सीखता है। बड़े बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया समझाते हुए अधिकारी आम लोगों को अनाथ बच्चों का समर्थन करने के लिए प्रेरित करता है और इस तरह नाटक समाप्त होता है। युवा कलाकारों में अभिमन्यु चौधरी, आदेश धर, पलशिन दत्ता, महक चिब, विशाल शर्मा और कुशल भट्ट शामिल थे।