जम्मू। संविधान दिवस के उपलक्ष्य पर जम्मू विश्वविद्यालय के लॉ स्कूल में संविधान और लैंगिक समानता पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। शुरुआत विभाग के फैकल्टी सदस्यों और छात्रों द्वारा संविधान की प्रस्तावना पढ़कर शपथ के साथ हुई। लॉ स्कूल की निदेशक प्रोफेसर मंजू जम्वाल ने अवसर की समानता के लक्ष्य के महत्व पर प्रकाश डाला। मौलिक कर्तव्यों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने लिंग संवेदनशील समाज की आवश्यकता पर बल दिया। प्रतिभागियों ने लैंगिक समानता में संवैधानिक प्रावधानों पर गहराई से चर्चा की। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सीमा शर्मा ने महिला सशक्तीकरण के लिए विभिन्न प्रावधानों और योजनाओं को अपनाने के बाद भी भारत में बढ़ते लिंग अंतर के बारे में जानकारी दी। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोनिका नारंग ने शिक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।
महिलाओं के प्रति समाज को समावेशी बनाने पर जोर
जम्मू। जम्मू विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के छात्रों और विद्वानों के लिए कार्यशाला का आयोजन किया। गृह विज्ञान विभाग की फैकल्टी प्रमुख प्रो समृद्धि अरोड़ा ने व्याख्यान दिया। समाज शास्त्र विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर और महिला अध्ययन केंद्र की प्रभारी निदेशक डॉ. हेमा गंढोत्रा ने आयोजन के महत्व को समझाया। छात्रों और विद्वानों के बीच लिंग जागरूकता पैदा करने के लिए केंद्र द्वारा किए गए प्रयास पर जानकारी दी।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग की प्रोफेसर संजना कौल ने बताया कि ऐसी कार्यशाला औपचारिक शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अशिक्षित समुदाय की महिलाओं के लिए केंद्र द्वारा संचालित आउटरीच गतिविधियों का उदाहरण भी दिया। कहा कि ऐसी कार्यशालाएं न केवल नजरिया बदलती हैं बल्कि समाज को अधिक समावेशी बनाती हैं। प्रोफेसर समृद्धि अरोड़ा ने उज्ज्वल भविष्य के लिए लड़कियों को सशक्त बनाना और उनका पोषण करना विषय पर बात की। समाज में लैंगिक समानता के लिए लैंगिक संवेदनशीलता की प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने गतिविधियों की मदद से लिंग और लिंग की अवधारणा को समझाया। ब्यूरो