जम्मू-कश्मीर में शांतिपूर्ण चुनाव हुए- पीएम मोदी
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जम्मू-कश्मीर में भाजपा सत्ता तक तो नहीं पहुंच पाई लेकिन 25.63 फीसदी के साथ सबसे ज्यादा वोट शेयर हासिल करने में सफल रही। 2014 में उसे 22.98 प्रतिशत वोट मिले थे। पार्टी को राज्य में अब तक की सबसे ज्यादा सीटें भी मिलीं। 2014 में भाजपा को पहली बार 25 सीटंे मिली थीं। इस बार पार्टी 29 सीटों पर पहुंच गई। भाजपा को 1987 के बाद साढ़े तीन दशक में सबसे बड़ी सफलता मिली है। जम्मू जिले ने तो कमाल ही कर दिया। प्रधानमंत्री मोदी का जम्मू की सरकार का नारा सिर चढ़कर बोला। 11 में से 10 सीटें हासिल करने में पार्टी कामयाब रही। हालांकि कश्मीर संभाग में 18 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, एक भी नहीं जीत सके।
चुनाव में लोगों को राहुल-अब्दुल्ला का साथ रास आया और 1987 के बाद पांचवीं बार गठबंधन सरकार का रास्ता साफ हुआ। नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ गठबंधन कर कांग्रेस सत्ता तक पहुंचने में तो सफल रही, लेकिन सीटों के साथ वोट शेयर भी घट गया। 2014 कांग्रेस ने 2014 विधानसभा चुनाव में 18.01 फीसदी मत प्रतिशत के साथ 12 सीटें हासिल की थीं, जबकि इस चुनाव में उसे छह सीटें मिलीं और मत प्रतिशत भी गिरकर 11.97 प्रतिशत रह गया।
नतीजे 5 अगस्त के फैसले के खिलाफ : फारूक
नतीजे सामने आने के बाद नेकां अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बनेंगे। डॉ. फारूक ने कहा कि नतीजे दर्शाते हैं कि यह 5 अगस्त 2019 के केंद्र के फैसले के खिलाफ जनता का फैसला है। उन्होंने कहा िक नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला दूसरी बार सीएम बनेंगे। इससे पहले 2008 में उन्होंने प्रदेश की कमान संभाली थी। छह साल बाद 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में नेकां को हार का सामना करना पड़ा था। उमर अब्दुल्ला ने कहा गठबंधन के सहयोगियों के साथ बैठक के बाद गठबंधन का नेता चुना जाएगा। इसके बाद वह सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।
1987 से गठबंधन की पांचवीं सरकार
- 1987 : नेकां-कांग्रेस गठबंधन की सरकार तीन साल ही चली
- 2002 : कांग्रेस-पीडीपी की तीन-तीन साल सरकार बनी।
- 2008 : नेकां-कांग्रेस फिर साथ आई। उमर पहली बार सीएम बने और छह साल सरकार चली।
- 2014 : पीडीपी-भाजपा की सरकार बनी। जून 2018 में भाजपा के समर्थन वापसी से सरकार गिरी
- 2024 : नेकां-कांग्रेस गठबंधन सरकार बनने की उम्मीद
पीडीपी : 2014 में भाजपा के साथ सरकार बनाई, 2024 में भी कीमत चुकाई
दस साल बाद हुए विधानसभां चुनाव में पीडीपी को भारी झटका लगा। 2014 में भाजपा के साथ सरकार बनाने की उसे भारी कीमत चुकानी पड़ी। खुद चुनाव से दूर रहकर महबूबा मुफ्ती ने अपनी बेटी इल्तिजा पर दांव लगाया था, लेकिन यह दांव भी उल्टा पड़ा और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। पीडीपी का मत प्रतिशत भी गिरकर 8.87 फीसदी रह गया, जो 2014 के चुनाव में 22.67 प्रतिशत था। 2014 में पीडीपी को 28 सीटें मिली थीं।
भाजपा के साथ गठबंधन की वजह से पार्टी की हार नहीं हुई। कई कारण रहे। घाटी में नेकां-पीडीपी में से किसी एक को जनता मौका देती है। इस बार जनता ने नेकां को मौका दिया। मैं फैसले को स्वीकार करती हूं।
- इल्तिजा मुफ्ती