बाबा जित्तो की याद में आयोजित झिड़ी मेला सात नवंबर से शुरू होगा। दो साल बाद मेला आयोजित हो रहा है। ऐसे में इसकी सुरक्षा के भी कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। झिड़ी इलाका कानाचक पुलिस के अंतर्गत आता है, जो बॉर्डर से महज एक किलोमीटर दूर है। ऐसे में दो साल से सीमा पार से आने वाले ड्रोन और इस इलाके से घुसपैठ होना भी एक चुनौती है। इसे देखते हुए मेले की सुरक्षा के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। इसमें पुलिस, बीएसएफ, अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है।
यहां एक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। यहां से मेले की पूरी निगरानी होगी। इस कंट्रोल रूम से ड्रोन और सीसीटीवी की मदद से नजर रखी जाएगी। इसके अलावा करीब 800 सुरक्षाकर्मियों को मेले की सुरक्षा में लगाया गया है। इसमें पुलिस, महिला पुलिस और सशस्त्र बल शामिल हैं। मेला स्थल से लेकर आसपास का एक किलोमीटर का क्षेत्र पूरी तरीके से सुरक्षा घेरे में रहेगा। पुलिस की ओर से जम्मू पुंछ नेशनल हाईवे, कानाचक बॉर्डर के आसपास अतिरिक्त नाके लगाए गए हैं।
यहां पुलिस और अर्धसैनिक बलों को संयुक्त रूप से तैनात किया गया है। पुलिस की तरफ से सुबह चार बजे से लेकर पांच बजे तक बॉर्डर से आने जाने वाले रास्तों पर वाहनों की विशेष चेकिंग होगी। पुलिस के सादी वर्दी में तैनात कर्मी मेले में 24 घंटे गश्त करेंगे ताकि संदिग्धों पर नजर रखी जा सके।
मेले में जरूरी सुविधाओं के निर्देश दिए
संबंधित अधिकारियों को साफ सफाई, श्रद्धालुओं के ठहरने, बिजली और पानी आदि जैसी जरूरी सुविधाओं के निर्देश दिए गए हैं और तमाम बंदोबस्त को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा नहीं होगी।
-अवनी लवासा, जिला उपायुक्त, जम्मू।
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आसमान से जमीन तक होगी निगरानी
मेले की सुरक्षा में महिला पुलिस, सशस्त्र बल, पुलिस के लगभग 800 सुरक्षाकर्मी 24 घंटे तैनात रहेंगे। ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी रखने के लिए एक कंट्रोल रूम बनाया गया है। यहां से मेले पर नजर रखी जाएगी। कुछ जगहों को चिन्हित कर वहां अतिरिक्त नाके स्थापित किए गए हैं। एसपी और डीएसपी स्तर के अधिकारी लगातार मेला स्थल का दौरा करेंगे। बीएसएफ के साथ मिलकर भी कुछ जगहों पर नाके स्थापित किए गए हैं ताकि सीमा से शहर को आने वाले रास्तों पर हर आते जाते पर नजर रखी जा सके।
-चंदन कोहली, एसएसपी, जम्मू।
मेले में आठ लाख लोगों के आने की उम्मीद
बता दें कि वर्ष 2019 के बाद मेले का आयोजन नहीं हो सका था। कोरोना की वजह से मेले का आयोजन नहीं हो सका, जबकि इसके पहले 2018 में भी बॉर्डर पर गोलाबारी के चलते मेला स्थगित कर दिया गया था। एक तरह से मेला तीन साल बाद होने जा रहा है। इसमें आठ लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।