संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। अपने को योग्य बनाकर नौकरी लेने नहीं बल्कि देने के काबिल बनें। किसी से शिकायत नहीं करें कि जिस चीज की अपेक्षा या इच्छा थी वह प्राप्त नहीं हुई। जो मिला है उसी में खुश रहें।
भगवान का शुक्र मनाएं कि जो मिला है यही सबसे अच्छा है। ये विचार जम्मू विश्वविद्यालय के जनरल जोरावर सिंह सभागार में रविवार को आनंदमूर्ति गुरु मां ने प्रभु भक्ति पर दिव्य प्रवचन की तीन दिवसीय शृंखला के समापन पर कही। उन्होंने महाराष्ट्र के एक नेत्रहीन व्यक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि व्यक्ति में कुछ करने की इच्छा होनी चाहिए। सब कुछ संभव है। एक नेत्रहीन व्यक्ति ने महाराष्ट्र में करीब 18000 नेत्रहीन लोगों को नौकरी दी। उन्होंने भक्तजनों में साकार विचारों का संचार करते हुए कहा कि माता वैष्णो देवी परम तपस्विनी थीं। वह राम काे पाना चाहती थी। लेकिन राम ने माता को तपस्या करने की प्रेरणा दी थी। राम ने कहा था कि जब तुम्हारी तपस्या पूरी होगी। तब तुम मुझे प्राप्त कर सकोगी।
पापों से मुक्ति पाने और शुद्धीकरण के लिए तीर्थ स्थान पर सेवा करें
आनंदमूर्ति गुरु मां ने कहा कि पापों से मुक्ति पाने और शुद्धीकरण के लिए तीर्थ स्थान पर जाकर सेवा करें। इससे पुण्य की प्राप्ति निश्चय होगी। उन्होंने कहा कि जिंदगी की असली कमाई साधना है। धन, माया और शरीर सब मिट्टी है। उन्होंने प्रेरणा दी कि छोटी आयु के बच्चों को मोबाइल न दें। बच्चा जिस तरह के कार्टून या बाकी चीजें देखता है। वह वैसा ही बनता है। ऐसा करने के बजाए उन्हें योग या अच्छी बात सिखाएं। उन्होंने जैविक भोजन पर भी जोर दिया है।