जम्मू। उर्दू भाषा और साहित्य में सामाजिक और सांस्कृतिक चुनौतियां विषय पर दो दिवसीय उर्दू लेखक सम्मेलन का आगाज सोमवार को जम्मू विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में हुआ। जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति और भाषा अकादमी (जेकेएएसीएल) ने द्वारा सम्मेलन का आयोजन किया है। इसमें उर्दू लेखकों ने भाग लिया और उर्दू के विकास और प्रचार-प्रसार पर अपनी बात रखी। लेखकों ने एक मत में कहा भाषा का विकास उन लोगों के हाथ में होता है जो उसको पढ़ते और लिखते हैं।
इस दौरान जेकेएएसीएल के सचिव भरत सिंह ने कहा कि उर्दू विभाग में कार्यक्रम के आयोजन का उद्देश्य उर्दू भाषा के विकास और बेहतर परिणाम प्राप्त करने में उर्दू के छात्रों और विद्वानों को जोड़ना था। उन्होंने कहा कि किसी भाषा का विकास उन लोगों के हाथ में होता हैं, जो उसे पढ़ते और लिखते हैं। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में उक्त विषय पर प्रो. कदूस जावेद ने विचार रखे। सत्र की अध्यक्षता जेएनयू के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. अनवर पाशा ने की। इस दौरान प्रो. अनवर पाशा ने नई पीढ़ी के लेखकों को सामाजिक विषयों के विभिन्न पहलुओं पर लिखने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उद्घाटन के बाद पेपर पढ़ने का सत्र हुआ। डॉ. नुसरत जबीन ने उर्दू भाषा और साहित्य के शिक्षण में सामाजिक और सांस्कृतिक चुनौतियां, डॉ. अलताफ अनुमन ने उर्दू भाषा और साहित्य की आलोचना में सामाजिक और सांस्कृतिक चुनौतियां, डॉ. अब्दुल राशिद मन्हास ने उर्दू भाषा और साहित्य की पत्रकारिता में सामाजिक और सांस्कृतिक चुनौतियां पर पेपर पढ़ा। इसके बाद संगीत कार्यक्रम हुआ। इसमें आदित्य लंगेह, तारिक परवेज और मुक्तेशी शर्मा ने प्रस्तुतियों से मन मोह लिया।