जेयू में आयोजित क्रॉस-एलओसी व्यापार और बस सेवा पर व्याख्यान में अपनी बात रखते वक्ता
जम्मू विश्वविद्यालय में क्रॉस एलओसी व्यापार और बस सेवा के दौरान सीमा प्रबंधन पर हुआ व्याख्यान
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू विश्वविद्यालय के रणनीतिक और क्षेत्रीय अध्ययन विभाग (डीएसआरएस) की ओर से बुधवार को क्रॉस एलओसी व्यापार और बस सेवा के दौरान सीमा प्रबंधन पर एक व्याख्यान हुआ। इसमें बताया गया कि 1990 और 2000 के बीच सीमा प्रबंधन की तमाम पेचीदगियों के बावजूद भारत ने पाकिस्तान के साथ बेहतर संबंध बनाने के लिए हमेशा नरम रुख अपनाया है।
व्याख्यान में प्रमोद जैन ने सुरक्षा, शांति, लोकतंत्र, मानवाधिकार, सुशासन, विकास और सांस्कृतिक कारकों को शामिल करते हुए सीमा प्रबंधन के मूलभूत घटकों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि क्रॉस एलओसी व्यापार और बस सेवा की शुरूआत जैसी पहल ने दक्षिण एशिया में सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1990 और 2000 के दशक में सीमा प्रबंधन की तमाम पेचीदगियों के बावजूद भारत ने पाकिस्तान के साथ बेहतर संबंध बनाने के लिए हमेशा नरम रुख अपनाया। उन्होंने सीमा पर बुनियादी ढांचे में वृद्धि पर जोर दिया। बाड़ लगाना और तकनीकी प्रगति से सशस्त्र बलों को लाभ होता है। ऑपरेशन सद्भावना जैसी पहल ने स्थानीय लोगों की शिकायतों को दूर करते हुए सेना और नागरिकों के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया है। जैन ने कहा कि सीमा प्रबंधन और मौजूदा राजनीतिक माहौल की विभिन्न चुनौतियों के बावजूद अपने संबंधों में सामान्य स्थिति बनाए रखने में भारत और पाकिस्तान के पारस्परिक हित थे। निदेशक डीएसआरएस, प्रोफेसर वीरेंद्र कौंडल ने अपनी टिप्पणी दी। व्याख्यान में जम्मू विश्वविद्यालय के पूर्व डीन डॉ. जिगर मोहम्मद, डीएसआरएस संकाय सदस्य, डॉ. मोहम्मद, मोनिर आलम, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. सुरिंदर मोहन, डॉ. गणेश मल्होत्रा और डॉ. रंजन शर्मा आदि मौजूदरहे।