पिता बोला - नहीं पता था यह विपत्ति टूट पड़ेगी, बेलीचराना में सुपुर्द-ए खाक किए दोनों बच्चों के शव
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। करीब 213 किलोमीटर दूर रोजी-रोटी की तलाश में आए परिवार को आभास नहीं था कि उन पर यह विपत्ति टूट पड़ेगी। मां के पलक झपकते ही दोनों मासूम जिंदगियां तवी में समा जाएंगी। यह दर्द भरी दास्तां रोजगार की तलाश में एक सप्ताह पहले अनंतनाग से परिवार के साथ जम्मू आए लियाकत अली (मृतक बच्चों के पिता) की है। भरे गले से लियाकत ने बताया कि उन्होंने 12 बकरियां रखी हैं। इनको चराने के लिए ही जम्मू में तवी किनारे डेरा डाला था, लेकिन पता नहीं था कि दुखों का पहाड़ टूट पड़ेगा।
सोमवार को ही दोनों बच्चों को नदी किनारे बकरियां चराने के लिए भेजा था। हालांकि उनकी मां भी साथ थी, लेकिन किसी काम के सिलसिले में कुछ देर के लिए घर आई थी। तवी किनारे ढलान पर पत्थर था, जहां आदिल हाथ धोने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पैर फिसलने से वह पानी में गिरने लगा। आसिया ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन वह भी उसके साथ गिर गई। लियाकत अली के चार बच्चे हैं। आदिल सबसे छोटा और आसिया उससे बड़ी थी। दोनों के शव बेलीचराना के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए खाक कर दिए गए।
सुबह निकाला आदिल और आसिया
का शव, दोनों पत्थर के नीचे फंसे थे
मंगलवार की सुबह दोनों के शव बरामद कर लिए गए। शव गहरे पानी में एक पत्थर के नीचे फंसे थे, जिन्हें स्थानीय गोताखोर मोहिंद्र लाल ने निकाला। इसके बाद एसडीआरफ और पुलिस की टीम घटनास्थल पर पहुंची। मोहिंद्र ने बताया कि सुबह करीब नौ बजे खुद तवी में तलाशी अभियान चलाया। नदी का कौन सा हिस्सा गहरा है या नहीं इसकी जानकारी उन्हें है। सुबह जब गोता लगाया तो दोनों बच्चों के शव दिखे, जिन्हें बाहर निकाल लिया गया। बताया जा रहा है चार माह पहले भी दो किशोर नहाते वक्त तवी में हर की पौड़ी के पास डूब गए थे, जो वाल्मीकि कॉलोनी के रहने वाले थे।