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Mayor Election: पहली बार यूपी की तर्ज पर होंगे जम्मू-श्रीनगर मेयर के चुनाव, विशेषज्ञों से ली जा रही राय

Fri, 25 Aug 2023 02:46 PM IST
kumar गुलशन कुमार डॉ. बृजेश कुमार सिंह, जम्मू

सार

अब तक जम्मू व श्रीनगर में पार्षद मेयर का चुनाव करते रहे हैं। जम्मू में 75 व श्रीनगर में 74 पार्षद निर्वाचित होते हैं। सूत्रों ने बताया कि जनता की ओर से सीधे चुनाव कराए जाने को लेकर आने वाली बाधाओं तथा अन्य औपचारिकताओं पर उच्च स्तरीय बैठक में विचार किया गया है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर में उत्तर प्रदेश की तर्ज पर पहली बार मेयर का चुनाव सीधे जनता से कराने की तैयारी है। इसके लिए नियम में संशोधन की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही अतिरिक्त ईवीएम भी मंगाई गई है। सरकार से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि आवास व शहरी विकास विभाग तथा मुख्य चुनाव अधिकारी इस दिशा में तैयारियां कर रहे हैं।

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कानूनी राय भी ली जा रही है। यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो जनता सीधे मेयर पद के उम्मीदवार के लिए मत डालेगी। अब तक जम्मू व श्रीनगर में पार्षद मेयर का चुनाव करते रहे हैं। जम्मू में 75 व श्रीनगर में 74 पार्षद निर्वाचित होते हैं।

सूत्रों ने बताया कि जनता की ओर से सीधे चुनाव कराए जाने को लेकर आने वाली बाधाओं तथा अन्य औपचारिकताओं पर उच्च स्तरीय बैठक में विचार किया गया है। इसके लिए चुनाव नियम में संशोधन क्या किए जाने हैं, इसका खाका तैयार कर लिया गया है।
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इन संशोधनों पर कानूनी राय ली जा रही है ताकि कोई पेच हो तो उसे दुरुस्त कर दिया जाए। जनता की ओर से सीधे मेयर के चुनाव के लिए जरूरी इंतजामात भी किए जा रहे हैं। निकाय चुनाव के लिए पूरे प्रदेश में 2500 बूथ बनाए गए हैं। यदि मेयर का चुनाव सीधे तौर पर होता है तो सभी बूथों पर एक अतिरिक्त ईवीएम लगानी होगी।

ऐसे में अतिरिक्त ईवीएम मंगाने की व्यवस्था की गई है। सूत्रों ने बताया कि उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में ईवीएम की खेप यहां पहुंच जाएगी। प्रत्येक बूथ पर दो ईवीएम रखने होंगे, एक मेयर तथा दूसरा पार्षद के लिए।

सूत्रों का कहना है कि कानूनी राय लेने के साथ ही इस बदलाव के नफे- नुकसान पर भी मंथन चल रहा है। कहा जा रहा है कि इसके फायदे अनेक हैं। एक तो मेयर का रुतबा बढ़ेगा। दूसरा इस व्यवस्था से फंडिंग भी बढ़ सकती है। अप्रत्यक्ष रूप से मेयर के चुनाव में होने वाली खरीद फरोख्त की संभावना भी कम हो जाएगी।

मुख्य चुनाव अधिकारी पांडुरंग के पोल का कहना है कि स्थानीय निकाय चुनाव की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। सीईओ कार्यालय का काम चुनाव कराना है, इसमें बदलाव आदि से जुड़े प्रकरण पर आवास विकास विभाग नियम कानून बनाएगा।

सीधे चुनाव के खतरे भी

सीधे चुनाव के खतरे भी बताए जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर संवेदनशील राज्य है। खासकर कश्मीर में समस्या खड़ी हो सकती है। यदि कोई असामाजिक तत्व चुनाव जीत जाता है तो फिर दिक्कत आ सकती है।

चुनाव अधिकारी बनाने के निर्देश

मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय की ओर से निकाय चुनाव कराने के लिए सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने स्तर से चुनाव अधिकारी तथा सहायक चुनाव अधिकारी नियुक्त कर लें। इसकी सूचना सीईओ कार्यालय को फोन नंबर के साथ उपलब्ध कराई जाए। उम्मीद है कि सभी जिलाधिकारियों की ओर से जल्द ही चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति कर दी जाएगी।

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