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Jammu News: बर्फ न गिरने से गुलमर्ग, पहलगाम में स्की व्यवसाय प्रभावित

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स्कीयर्स ने प्री बुकिंग रद्द कीं, पर्यटन पर भी असर
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कश्मीर में चिल्ले कलां के बीच जनवरी माह में भी बर्फ न गिरने से स्की के लिए विख्यात गुलमर्ग और पहलगाम में यह व्यवसाय बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। गत एक दिसंबर से करीब दो माह के लंबे ड्राई स्पेल से खासतौर पर गुलमर्ग में पहुंचने वाले देश विदेश के सैकड़ों स्कीयर्स को निराशा हुई है। स्की के साथ जुड़ा होटल व्यवसाय और स्थानीय रोजगार भी प्रभावित है। बर्फ पर स्की के शौकीनों और नए प्रशिक्षुओं ने प्री बुकिंग रद्द करवा दी है। गुलमर्ग में ही हर साल करीब सौ सेंटीमीटर तक बर्फ गिर जाती है। मौसम में आए इस बदलाव को जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देखा जा रहा है।
गुलमर्ग में पिछले तीन साल से स्की प्रशिक्षण दे रही ट्रैवल एजेंसी हाई आन ट्रिप्स की ऋतिका गर्ग ने बताया कि उनके पास जनवरी माह के करीब दस समूह की बुकिंग थी, जिसमें 5 से 7 लोग रहते हैं। इसमें लड़के, लड़कियां, मित्र और दंपत्ति स्की के लिए आते हैं। इसमें नए स्कीयर्स को तैयार करने के साथ प्रशिक्षित स्कीयर्स बर्फ में मजा लेते हैं। लेकिन इस बार गुलमर्ग में जनवरी में भी बर्फ नहीं गिरने से स्की सीजन बुरी तरह से प्रभावित हुई है। गुलमर्ग में ऐसे कई गंतव्य निकल आए हैं, यहां बर्फ के बजाय पत्थर दिख रहे हैं और वहां स्की करना नामुमकिन है। वैसे हर साल सामान्य तौर पर दिसंबर में ही बर्फबारी के बाद स्कीयर्स का गुलमर्ग में पहुंचना शुरू हो जाता था, लेकिन इसमें 10 जनवरी से 20 फरवरी तक अधिक बर्फ रहने से स्की का पीक सीजन रहता है। गुलमर्ग में ही हर साल एक हजार से अधिक लोग स्की के लिए पहुंच रहे थे और लोगों में इसका रुझान लगातार बढ़ रहा है। इसमें नए स्कीयर्स को बेबी स्लोप, फेस 1 आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है और गुलमर्ग में यह सभी गंतव्य बर्फ के बीच उपलब्ध होते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है। जलवायु परिवर्तन से 2023 गर्म साल रहा है, जिससे यह सारे प्रभाव दिख रहे हैं। स्की का सीजन न होने से इस व्यवसाय से जुड़े विभिन्न वर्ग के लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ है। स्की के लिए आने वाले स्कीयर्स ने होटलों में लगभग एडवांस बुकिंग रद्द करवा दी है, जिससे होटल व्यवसाय में भी मंदी है। स्की व्यवसाय के साथ आम पर्यटकों के गुलमर्ग नहीं पहुंचने से पर्यटन क्षेत्र भी प्रभावित है।
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स्नो सीजन आगे खिसक सकता : निदेशक
मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर के निदेशक डाॅ. मुख्यतार अहमद ने बताया कि जलवायु परिवर्तन और दूसरे कारणों से इस साल स्नो सीजन समय पर नहीं हुआ है। दिसंबर से लगभग जनवरी के खत्म होने तक नाममात्र ही बारिश और बर्फबारी हुई है। लेकिन आगामी 3 फरवरी तक जम्मू कश्मीर के कुछ हिस्सों में बारिश और बर्फबारी के आसार हैं, जिससे संभावना है कि स्नो सीजन आगे खिसक सकता है। इसका विभिन्न क्षेत्रों पर प्रभाव दिख सकता है। मौजूदा कश्मीर के अधिकांश हिस्सों में रात का तापमान शून्य डिग्री से नीचे चल रहा है और अगर बर्फ पड़ती है तो वह आगे समय तक टिकी रह सकती है।
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बारिश, बर्फबारी न हुई तो सेब व्यवसाय पर भी मंदी के बादल
अनंतनाग से फल उत्पादक जहांगीर खान ने बताया कि कश्मीर में विभिन्न किस्म का सेब उत्पादन की प्रक्रिया मार्च से शुरू हो जाती है और इसके लिए पर्याप्त पानी की जरूरत होती है, जो बर्फबारी से पूरी होती है। इस साल सीजनल बर्फबारी नहीं हुई है और अगर फरवरी में भी पर्याप्त बर्फबारी नहीं हुई तो इसका सेब उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा। ऐसी परिस्थितियों में अगर सेब उत्पादन कम हुआ तो बाजार में इसके दाम बढ़ जाएंगे। जिसका लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।
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