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International Day of Peace : सरहद पार पहुंची कविता मकसद लेकर लौटी... मिला दिए 400 बिछड़े परिवार

Wed, 21 Sep 2022 04:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा ओमपाल संब्याल, जम्मू

सार

Jammu : करीब पांच साल पहले पुंछी जुबान में लिखी कविता का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हुआ। वायरल होकर एलओसी पार पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) पहुंच गया। उस पार पुंछी भाषी लोगों में वीडियो चर्चित हो गया।
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बिछड़ों को मिलाने वाली रोमी... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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करीब पांच साल पहले पुंछी जुबान में लिखी कविता का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हुआ। वायरल होकर एलओसी पार पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) पहुंच गया। उस पार पुंछी भाषी लोगों में वीडियो चर्चित हो गया। इसी बीच पीओजेके के एक बुजुर्ग ने एक बच्चे से वीडियो संदेश भिजवाया कि 1947 में उनकी बहन इस पार आ गई थी। उसका नाम जानकी था और उसकी आंख के नीचे काला मस्सा था। उसका हाल बता दें तो मेहरबानी होगी।

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वीडियो शेयर करने वाली रोमी शर्मा ने जानकी का परिवार खोज निकाला। इस पहले मामले से मिली खुशी ने रोमी को मकसद दे दिया। 2018 में पीओजेके के पलंदरी में गोरा गांव स्थित बुल्ली सरगेल के मीरू बाबा का परिवार मिलाने से शुरू हुआ सफर आज 400 परिवारों तक पहुंच गया है। न सिर्फ जम्मू-कश्मीर बल्कि दोनों मुल्कों के विभाजन से बिछड़े अन्य राज्यों से कई परिवार भी दशकों बाद एक दूसरे के संपर्क में आए हैं। 1947 में राजस्थान के गंगानगर के एक परिवार से बिछड़ी भज्जो भी अपने परिवार से मिलीं जो पाकिस्तान जाने के बाद सकीना बन चुकी थीं।

दादा-दादी की जुबानी जाना दर्द
जम्मू में गाडीगढ़ रहने के बाद दिल्ली शिफ्ट हुईं रोमी शर्मा टीवी एक्टर और लेखक हैं, जिनके दादा-दादी 1947 में पीओजेके के पलंदरी से रातो रात भाग आए थे। रोमी शर्मा ने बताया कि दादा-दादी एलओसी के इस तरफ आने पर अपने पुराने घर को याद करते थे। पुंछी बोली में करें (घर) का जिक्र कर वो एलओसी पार अपनी जड़ों से जुड़ने की हसरत बयान करते। दादा-दादी गुजर गए लेकिन बड़े होने पर उनका यह दर्द समझ में आया और अब उस पीढ़ी के बिछड़े लोगों को मिलाना जिंदगी का मकसद बन गया है।
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रोमी के सोशल मीडिया पेज ‘अपना पुंछी परिवार’ पर 80 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। ये मंच एलओसी के दोनों तरफ के लोगों का एक दूसरे तक पैगाम पहुंचाता है। रोमी का कहना है कि शुरुआत में उन्हें कुछ लोग खुफिया एजेंसी रॉ का एजेंट कहने लगे लेकिन धीरे-धीरे लोगों को मकसद और मंशा दोनों समझ में आ गई। उनका मंच सार्वजनिक है, इसलिए उन्हें कोई डर नहीं है।

मेरी अस्थियां बेतार नदी में बहाना ताकि उस पार मिट्टी में मिल जाएं
एक मामला साझा करते हुए रोमी ने बताया कि पुंछ के एक बुजुर्ग एलओसी पार अपने पुरखों के घर जाने की हसरत लेकर चल बसे। उन्होंने वसीयत में कहा था - मेरी अस्थियां पुंछ से पीओजेके जाने वाली बेतार नदी में बहाना ताकि वो वहां जाकर मेरी मिट्टी में मिल जाएं। पहली बार पीओजेके के जिन मीरू बाबा की बहन जानकी का परिवार खोजा गया, वो जानकी मर चुकी थीं, जबकि जानकी की अगली पीढ़ी अपने मामा मीरू बाबा समेत अन्य पुरखों के गया जी में पिंड दान कर चुके थे। अब यह परिवार वर्चुअल संपर्क में है।

महाराजा जयंती की छुट्टी पर एलओसी पार से भी मुबारकबाद
जम्मू-कश्मीर के अंतिम महाराजा हरि सिंह की जयंती 23 सितंबर की सरकारी छुट्टी पर पीओजेके से भी मुबारकबाद आईं। हालांकि कुछ लोगों ने इसका विरोध भी किया। रोमी ने बताया कि वे हर साल 22 अक्तूबर से 27 अक्तूबर तक सोशल मीडिया पर खास आयोजन करती हैं, जिसमें जम्मू-कश्मीर में कबाइली हमले और उससे जुड़ी साजिशों का पर्दाफाश किया जाता है। 

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