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Jammu News: कोविड काल में खरीदे 150 वेंटिलेटर, 129 आज फांक रहे धूल

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जम्मू। कोविड काल के दौरान मानव जीवन को बचाने के लिए सरकारी अस्पतालों के लिए पीएम केयर फंड के माध्यम से सैकड़ों वेंटिलेटर खरीदे गए। इन वेंटिलेटरों ने हजारों लोगों के जीवन को बचाने का काम भी किया, लेकिन आज ये वेंटिलेटर स्टोरों में धूल फांक रहे हैं। जीएमसी जम्मू में ही ऐसे 150 वेंटिलेटर में से 129 बंद पड़े हुए हैं। 21 पोर्टएबल वेंटिलेटर को ही प्रयोग में लाया जा रहा है। यही हालत जम्मू कश्मीर के अधिकांश मेडिकल कालेजों और जिला अस्पतालों में है।
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डाॅक्टरों का यह भी तर्क है कि कोविड मरीजों को ध्यान में रखते हुए उक्त वेंटिलेटर निर्मित किए गए थे, जिसका उद्देश्य प्रमुख रूप से हाई प्रेशर में आक्सीजन की सप्लाई देना था, लेकिन यह हाईएंड (आधुनिक) वेंटिलेटर नहीं थे। हाईएंड वेंटिलेटर से आक्सीजन के साथ मानव शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों को स्पोर्ट देने में मदद मिलती है। जीएमसी जम्मू की बात करें तो कोविड के दौरान संभाग के दस जिलों से सभी गंभीर मरीजों को इसी अस्पताल ने देखा था। संभाग स्तर पर इसी मेडिकल कालेज में सबसे अधिक वेंटिलेटर स्थापित थे। उस समय आपात स्थिति में कुल एक हजार बिस्तरों में से 556 बिस्तर कोविड मरीजों को समर्पित किए गए थे। उस समय मरीजों को सबसे अधिक जरूरत आक्सीजन की महसूस की गई थी। जिसके बाद जीएमसी के लगभग वार्डों में सभी बिस्तरों को आक्सीजन की सप्लाई से जोड़ दिया गया था। जीएमसी प्रशासन के अनुसार पीएम केयर वाले वेंटिलेटरों का साप्ताहिक स्तर पर रखरखाव किया जा रहा है।
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जीएमसी में स्थापित हैं 1067 बिस्तर, सामान्य 70 वेंटिलेटर चल रहे
जीएमसी जम्मू में 15 वार्डों (13 को छोड़कर) के अलावा एनआरटी, बर्न वार्ड, न्यूरो सर्जरी, मिको, स्पाइनल वार्ड, आइसोलेशन वार्ड में 805 और विभिन्न तरह के आपात केंद्रों में 262 बिस्तर स्थापित हैं। इनमें मरीजों की जरूरत को पूरा करने के लिए मौजूदा 83 हाईएंड वेंटिलेटर में से 70 काम कर रहे हैं, जबकि अन्य स्टैंडबाय रखे गए हैं। जीएमसी में संभागभर के मरीजों के लोड से अक्सर वेंटिलेटर के लिए जद्दोजहद रहती है, जिससे लगभग सभी वेंटिलेटर मरीजों से पैक रहते हैं।
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पीएम केयर वाले वेंटिलेटर का रखरखाव किया जा रहा: जीएमसी प्रशासन
जीएमसी प्रशासन के अनुसार पीएम केयर वाले वेंटिलेटरों के भविष्य के प्रयोग के लिए सरकार को लिखा गया है। इन्हें प्रमुख रूप से कोविड के दौरान प्रयोग में लाया गया था। गंभीर मरीजों के लिए हाईएंड वेंटिलेटर की अहम जरूरत होती है। जीएमसी के प्रिंसिपल डाॅ. आशुतोष गुप्ता का दावा है कि पीएम केयर वाले वेंटिलेटर का सही रखरखाव किया जा रहा है, ताकि भविष्य में कोविड जैसी किसी संक्रमित बीमारी के पनपने पर इन्हें प्रयोग में लाया जा सके।

प्रशिक्षित स्टाफ की कमी चुनौती
अस्पताल में सभी वेंटिलेटर को चलाने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ की कमी बड़ी चुनौती रहती है। हाईएंड वेंटिलेटर पर मरीज को उपचार देने के लिए एनेस्थीसिया विभाग के साथ अन्य स्पोर्टिंग स्टाफ की जरूरत होती है, लेकिन जीएमसी और दूसरे अस्पतालों में पहले से ही प्रशिक्षित स्टाफ की भारी कमी है। इसके चलते सभी वेंटिलेटर को चलाना भी मुश्किल है।
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