जम्मू। जम्मू विश्वविद्यालय के नेहरू हॉल बॉयज हास्टल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप एक संवाद सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, द्वारका, नई दिल्ली के संकाय सदस्य प्रो. प्रसन्नांशु ने हॉस्टल के विद्वानों के साथ चर्चा की। विद्वानों को डॉक्टरेट के बाद उनके लिए उपलब्ध अवसरों के बारे में बताया गया।
प्रो. प्रसन्नांशु ने शोध और शोध पद्धति के महत्व पर जोर दिया। सफल अकादमिक कॅरिअर में अच्छा प्रकाशन रिकॉर्ड, अनुभव और साहित्य में सक्रियता की आवश्यकता पर बल दिया। विद्वानों को खुले दिमाग के साथ कार्य संस्कृति अपनाने के महत्व पर जोर दिया, जिससे राष्ट्र के शैक्षणिक और सामाजिक विकास में योगदान मिलेगा। इस दौरान विद्वानों ने कई प्रश्न पूछे। सत्र हॉस्टल के वार्डन डॉ. जोगिंदर सिंह और रेजिडेंट वार्डन डॉ. पीपी सिंह ने विषय पर अपनी बात रखी। जम्मू विश्वविद्यालय के विधि विभाग के छात्र और सीमा कल्याण संगठन के अध्यक्ष अविनाश चौधरी ने भी नशीली दवाओं के दुरुपयोग और इससे निपटने में शिक्षाविदों की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।