जम्मू पुलिस की हिरासत में आरोपी
- फोटो : पीआरओ
जम्मू के नरवाल से हथियारों के साथ गिरफ्तार मोहम्मद यासिन आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद का पुराना समर्थक है। वह दो वर्षों से जैश के लिए काम कर रहा था। आतंकियों तक हथियार और जरूरी मदद पहुंचा रहा था। इसके लिए यासिन को हर एक काम के लिए 60 हजार से एक लाख रुपये मिलते थे।
जानकारी के अनुसार यासिन अभी ढाई महीने पहले ही जेल से छूट कर आया था। जिस पर गैर कानूनी गतिविधियों में संलिप्त होने का मामला दर्ज था। वह आतंकियों के लिए जरूरी मदद पहुंचाने में गिरफ्तार किया गया था। 7 नवंबर को वह दोनों सहयोगियों के साथ जम्मू पहुंचा था। यहां इसने हिंदुस्तान पेट्रोलियम के रेलवे स्टेशन डिपो से टैंकर को डीजल से फुल किया। इसके बाद यह सिद्दड़ा स्थित पर्यावरण पार्क के पास पहुंचा। यहां इन लोगों ने छुपाए गए हथियारों को निकाला और इन्हें केबिन में रख दिया।
सही समय पाकर भागने के फिराक में थे
मोहम्मद यासिन ने पूछताछ में बताया कि वह बार बार हाइवे पर इसलिए रुक रहा था, ताकि सही समय पाकर भाग सके। उन्हें भागने के लिए कोई सही समय नहीं मिल रहा था। इसलिए कभी कहीं तो कभी कहीं रुक रहे थे। इसके पहले कि वह भागते, उसके साथियों ने तैश में आकर पुलिस कर्मियों से मारपीट कर दी। इसके चलते पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
व्हाट्सएप लोकेशन से भेजी जा रही खेप
बता दें कि इससे पहले सिद्दड़ा स्थित ही एक रेस्तरां के बाहर दो साल पहले आईईडी बरामद की गई थी। यह आईईडी आतंकियों ने रखी थी, जिसे बस स्टैंड से बरामद किया गया था। आतंकी इसे लेकर जा रहे थे। इसके अलावा बठिंडी के पास एक साल पहले 27 जून को आईईडी बरामद की गई थी। इसे भी आतंकियों ने रखा था और इसकी व्हाटसएप लोकेशन बनाकर भेजी थी। पाकिस्तान में बैठे आतंकी हेंडलर ड्रोन के जरिए हथियार और गोला बारूद भेजते हैं। इसे कहीं पर रखवा दिया जाता है। इसके बाद व्हाट्सएप पर लोकेशन का वीडियो बनाकर भेज दिया जाता है।
किसने रखा और किसको देने थे, जांच में जुटी पुलिस
सिद्दड़ा पर्यावरण पार्क के पास हथियार किसने रखे थे और आरोपियों ने कश्मीर में किसको देने थे। इसकी पूछताछ जारी है। फिलहाल इनको यह बताया गया था कि पर्यावरण पार्क के पास से हथियार लेने हैं। जब कश्मीर पहुंचोगे तो बता दिया जाएगा कि किसको हथियार देने हैं।